'तालिबान हथियार छोड़ें तो वार्ता संभव'

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Image caption तालिबान की शर्त है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सेना पहले हटे तब बातचीत करेंगे

पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने कहा है कि अगर तालिबान विद्रोही हथियार छोड़ दें तो सरकार उन से शांति वार्ता करने के लिए तैयार है.

उन्होंने क्वेटा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हमें बातचीत के लिए प्रतिबंधित संगठनों की ओर से कुछ संदेश मिले हैं और वही संदेश हमने अपने नेतृत्व के सामने रखे हैं.”

उनके मुताबिक़ चरमपंथियों के साथ बातचीत के लिए कोई एजेंडा तब तय होगा जब वह हथियार छोड़ देंगे.

उन्होंने आगे कहा, “अगर वह समझते हैं कि उनके हाथों में हथियार होगा और वह बातचीत करेंगे तो ऐसा कभी नहीं हो सकता.”

दोनों पक्ष बातचीत करने के संकेत दे रहे हैं लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि चरमपंथी पाकिस्तानी सेना से युद्ध कर रहे हैं ऐसे में संभव नहीं दिखता कि वे अपने हथियार डाल सकेंगे.

इससे पहले सरकार और चमरपंथियों के बीच जो भी वार्ताएँ हुई हैं उसमें कोई शर्त नहीं रखी गई थी जिसकी वजह से हिंसा समाप्त नहीं हो सकी.

ग़ौरतलब है कि कुछ हफ़्ते पहले स्थानीय तालिबान के एक वरिष्ठ नेता ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा था कि पाकिस्तान के साथ उनकी बातचीत उस वक़्त तक कामयाब नहीं हो सकती जब तक अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना मौजूद है.

पाकिस्तानी सेना ने क़बायली इलाक़ों में मौजूद तालिबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कई सैन्य अभियान किए हैं लेकिन सेना चरमपंथ को ख़त्म करने में नाकाम रही है.

चरमपंथियों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान पाकिस्तान में कई आत्मघाती हमले और बम धमाके किए हैं जिसमें सैंकड़ों आम शहरी मारे जा चुके हैं.

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