पाक में शरण ले रहे चरमपंथियों से ख़तरा:पेंटागन

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Image caption पेंटागन वर्ष में दो बार अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के काम का आकलन जारी करता है

अमरीकी रक्षा विभाग ने चेतावनी दी है अफ़ग़ानिस्तान में जारी अंतरराष्ट्रीय अभियान की सफलता को पाकिस्तान में शरण ले रहे चरमपंथी गुटों से ख़तरा है.

पेंटागन के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा संबंधी हालात सुधरे हैं और तालिबान की ओर से किए जा रहे हमलों में कमी दर्ज की गई है.

हालांकि पेंटागन ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी इलाकों में बढ़ रही हिंसा ख़तरनाक संकेत है और इन हमलों में शामिल चरमपंथी गुट पाकिस्तानी हलकों में मौजूद हैं.

पेंटागन का कहना है कि इन गुटों को पाकिस्तान की ओर से मदद भी मिल रही है.

पेंटागन ने अपनी इस रिपोर्ट में दोहराया है कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाके जिन्हें आमतौर पर चरमपंथी गुटों की पनाहगाह माना जाता है, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षाबलों और अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षाबलों के लिए ख़तरे पैदा कर रहे हैं.

साथ ही इन इलाकों से चरमपंथी गुटों को रसद और ज़रूरी सामान भी मिल रहा है.

तालिबान लड़ाकों को पाकिस्तान का समर्थन

साल में दो बार जारी होने वाली अपनी रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा है कि इस इलाके में स्थिरता बहाल करने की राह में राजनीतिक उठापटक और भ्रष्टाचार भी एक बाधा है.

वाशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक यह खबर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए बुरी खबर है जिन्हें अगले साल चुनाव लड़ना है.

ओबामा कह चुके हैं कि साल 2012 के सिंतंबर महीने तक अफ़ग़ानिस्तान से 10 हज़ार सैन्य दल वापस बुला लिए जाएंगे.

अफ़ग़ानिस्तान के ये हालात ही अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों में दरार की सबसे बड़ी वजह है.

इससे पहले अफ़गानिस्तान में अमरीकी सेनाओं के ख़िलाफ़ तालिबान लड़ाकों को पाकिस्तान का समर्थन मिलने संबंधी नई बातें सामने आई थीं.

तालिबान के कई लड़ाकों ने बीबीसी को बताया था कि उन्हें बम बनाने की ट्रेनिंग पाकिस्तान के अधिकारियों से मिलती रही है.

पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान की सीमा पर तैनात अमरीकी सैनिकों ने भी बीबीसी से कहा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को तालिबान को समर्थन करते हुए देखा है.

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