कुछ समय के लिए कश्मीर को भूल जाएँ: इमरान

इमरान खान
Image caption इमरान ख़ान से पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भी कश्मीर को लेकर ऐसा ही सुझाव दिया था

पाकिस्तानी राजनेता और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खा़न ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को कुछ समय के लिए कश्मीर मुद्दे को किनारे रख देना चाहिए.

इमरान ख़ान ने कहा कि अगर दोनों देश दोस्ती की राह पर चलना चाहते हैं और विश्वास बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं तो उन्हें कुछ समय के लिए कश्मीर को भूल जाना चाहिए.

खा़न का मानना है कि कश्मीर में किसी भी तरह की अस्थिरता और मुंबई हमले जैसे वारदातों की पुनरावृत्ति से हम एक बार फिर से उसी दोराहे पर आकर खड़े हो सकते हैं, जहां से हमने शुरुआत की थी.

इमरान के अनुसार ये इकलौता ऐसा मुद्दा है जो दोनों देशों को नज़दीक आने से रोक रहा है.

कश्मीर दोनों देशों के बीच एक अहम् मुद्दा है और विश्वास बहाली के तमाम उपायों के बावजूद अगर हमारी प्राथमिकताओं की सूची में कश्मीर होता है तो हम फिर से वहीं पहुंच जाएंगे जहां से आगे बढ़े थे.

व्यापार से बढे़गा विश्वास

टीवी चैनल सीएनएन आईबीएन के एक कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' में इमरान ख़ान ने कहा कि उन्हें डर है कि कश्मीर में किसी तरह की आतंकी घटना हो या मुंबई में 26/11 जैसे हमले, ये दोनों देशों के रिश्ते में फिर से खटास ला देगा.

इमरान ने तीन साल पहले पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें ज़रदारी ने आने वाली पीढ़ियों को भी कश्मीर मुद्दा से किनारा करने को कहा था ताकि दोनों देश एक दूसरे पर विश्वास कर सकें.

इमरान मानते है कि विश्वास बहाली के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार साझेदारी होगी जिससे चरमपंथी और खुफिया एजेंसियों की भूमिका कम हो जाएगी और हम अपने मुद्दों को बातचीत के ज़रिए सुलझा पाएंगे.

रिश्तों में आई नर्मी- हिना रब्बानी

उधर पाकिस्तान विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने भी भारत-पाक रिश्तों पर कहा है कि इस वक्त दोनों देशों के बीच काफी हद तक विश्वास बहाल हो चुका है.

खर ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरु करने लिए इसे उपयुक्त समय बताया है.

हालांकि हिना रब्बानी खर के अनुसार जिस तरह से भारत 26/11 मुद्दे के पीछे लगा हुआ है उसी तरह उसे समझौता एक्सप्रेस पर हमला करने वालों को भी सज़ा दिलवाने के लिए इतनी ही तत्परता दिखानी चाहिए.

हिना के अनुसार, "हम पड़ोसी मुल्क हैं, और एक-दूसरे से बेहतर रिश्ता चाहते हैं और कश्मीर मुद्दा सुलझने तक हम कम्फर्ट ज़ोन में नहीं आ सकते."

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