पाकिस्तानी संसद ने महिलाओं को दी राहत

पाकिस्तानी महिलाएँ इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पाकिस्तान में लड़कियों की कम उम्री में और उनकी क़ुरान से शादी की पुनारी प्रथा मौजूद है.

पाकिस्तानी संसद ने महिलाओं के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो रही पुरानी परंपराओं के ख़ात्मे के लिए एक क़ानून की मंज़ूरी दी है.

पाकिस्तान में कम उम्र लड़कियों की शादी, लड़कियों की क़ुरान से शादी और उन्हें संपत्ति के मामलों में अधिकार से वंचित रखना जैसी पुरानी परंपराएं अब भी प्रचलित हैं.

इस विधेयक के मसौदे के तहत लड़कियों की जबरन या क़ुरान से शादी करवाने के आरोप में किसी व्यक्ति को दस साल की क़ैद और दस लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. साथ ही अभियुक्त की कोई ज़मानत भी नहीं होगी.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) की सांसद डॉ. दोनिया अज़ीज़ ने संसद में ये विधेयक पेश किया और इसे सर्वसम्मति से पारित कर लिया गया.

इस क़ानून को ‘प्रवेंशन ऑफ़ ऐंटी-वुमन प्रैक्टिस ऐक्ट 2011’ का नाम दिया गया है.

विधेयक के मसौदे के में पाकिस्तान दंड संहिता में ‘महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध’ के विषय से एक नया अध्याय जोड़ दिया गया है और कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति धोखाधड़ी और अवैध रुप से किसी महिला को संपत्ति के आवंटन के मौक़े पर उनके अधिकार से वंचित रखेगा, तो उस व्यक्ति ज़्यादा से ज़्यादा दस साल और कम से कम पाँच क़ैद और दस लाख रुपय का जुर्माना या दोनों सज़ाएँ दी सकेंगी.

'जबरन शादी ग़ैरक़ानूनी'

इस विधेयक की एक धारा में लिखा गया है कि ‘कोई भी व्यक्ति किसी घरेलू झगड़े के सुलझने के बदलने में किसी महिला से शादी करता है या किसी महिला को शादी के लिए मजबूर करता है, उस स्थिति में ज़्यादा से ज़्यादा सात साल और कम से कम तीन साल की क़ैद और पाँच लाख रुपय जुर्माना की सज़ा होगी.’

जबकि किसी महिला को क़ुरान से शादी करने के लिए मजबूर करने वाले को सात से तीन साल तक क़ैद होगी और पाँच लाख रुपय का जुर्माना लागू किया जाएगा.

इस विधेयक की एक अन्य धारा के मुताबिक़ प्रांतीय सरकारें बलात्कार की सज़ाओं में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगीं और ऐसी सज़ाओं को माफ़ करने या ख़त्म करने का भी प्रांतीय सरकारों को कोई अधिकार नहीं होगा.

संसद के निचले सदन से पारित को होने के बाद ये विधेयक संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया जाए और वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करेंगे.

संबंधित समाचार