विवादों में फंसे पाक राजदूत ने की इस्तीफ़े की पेशकश

हुसैन हक्कानी
Image caption हक्क़ानी ने ऐसे किसी भी ज्ञापन को तैयार करने और पेश करने की बात से इंकार किया है.

अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने खुद पर लगे एक आरोप के चलते इस्तीफ़ा देने की पेशकश की है.

हक़्क़ानी पर आरोप है कि उन्होंने कथित रुप से पाकिस्तान में सेना की बढ़ती ताकत के खिलाफ़ अमरीका से मदद मांगी थी.

अमरीका में रहने वाले एक 'लॉबिस्ट' ने आरोप लगाया था कि हुसैन हक़्क़ानी ने पाकिस्तान में सेना की ओर से तख़्ता पलट की संभावित कोशिशों को रोकने के लिए अमरीकी सरकार को एक ज्ञापन सौंपा था.

गुप्त ज्ञापन

हालांकि हक़्क़ानी ने ऐसे किसी भी ज्ञापन को तैयार करने या पेश करने की बात से इनकार किया है.

ये विवाद गहराता जा रहा है और अमरीकी सेनाओं के प्रमुख माइकल मलेन ने इस तरह का एक गुप्त ज्ञापन उन्हें सौंपे जाने की पुष्टि की है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ज्ञापन को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

बीबीसी संवाददाता साजिद इक़बाल का कहना है कि हुसैन हक़्क़ानी के इस्तीफ़े ने पाकिस्तान में सत्ता पर काबिज़ लोकतांत्रिक सरकार और सेना के बीच कटु संबंधों के विवाद को हवा दे दी है.

अमरीका की मदद

इस कथित गुप्त ज्ञापन पर विवाद उस वक्त शुरु हुआ जब ब्रितानी समाचार पत्र फाइनेंनशियल टाइम्स ने 10 अक्तूबर को पाकिस्तानी मूल के एक अमरीकी व्यापारी मंसूर इयाज़ का लेख छापा.

मंसूर इयाज़ ने इस लेख में मलेन को दिए गए एक ज्ञापन का हवाला देते हुए लिखा कि, ‘पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने सेना की कमान बदलने और चरमपंथी संगठनों से नाता तोड़ने की बात कही थी.’

इस लेख के मुताबिक ज़रदारी पाकिस्तान के खुफ़िया तंत्र में मौजूद उस यूनिट या धड़े को हटाना चाहते थे जिस पर चरमपंथियों की ओर नरम होने का आरोप है.

तलब हुए हक़्क़ानी

हुसैन हक़्क़ानी को पाकिस्तान की नागरिक सरकार और ओबामा प्रशासन के बीच एक कड़ी माना जाता है और यही वजह है कि पाकिस्तानी मीडिया में उन पर ये ज्ञापन तैयार करने के आरोप लगे.

इस बीच पाकिस्तान सरकार ने हुसैन हक़्क़ानी को इस्लामाबाद तलब किया है.

अमरीका से छपने वाली पत्रिका फ़ॉरन पॉलिसी के अनुसार हुसैन हक़्कानी ने राष्ट्रपति ज़रदारी को दिए इस्तीफ़े में लिखा है, "किसी भी समय मुझे आपने या पाकिस्तान सरकार में किसी ने भी ज्ञापन लिखने के नहीं कहा और न ही मैंने ऐसा कोई ज्ञापन लिखा या सौंपा है...मुझ पर लगातार पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ होने के आरोप लगे हैं चाहे मैंने केवल राजनीतिक मामलों में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया है."

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