कौन हैं शेरी रहमान?

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Image caption रहमान 2008 चुनावों के बाद केंद्रीय सूचना मंत्री बनीं

अमरीका के लिए पाकिस्तान की नई राजदूत शेरी रहमान पाकिस्तान के उन मशहूर उदारवादी राजनेताओं में से एक हैं, जिन्होंने विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून को ख़त्म करने का समर्थन किया था.

ईश-निंदा क़ानून को ख़त्म करने का समर्थन करने पर उन्हें धमकियाँ भी मिली. उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी काफ़ी काम किया है.

वो अपनी पार्टी की पूर्व प्रमुख बेनज़ीर भुट्टो की तरह आकर्षक, समृद्ध और पाकिस्तान जैसे रूढ़िवादी देशों में अल्पसंख्यकों का समर्थन करने वाली हैं.

शेरी रहमान का जन्म 1960 में कराची के एक सिंधी परिवार में हुआ. उनके पिता वकील थे, जबकि उनकी माता पाकिस्तान की केंद्रीय बैंक की पहली महिला अध्यक्ष बनी.

'पत्रकारिता से शुरुआत'

उन्होंने बतौर पत्रकार अपने करियर की शुरुआत की और वो पिछले 20 सालों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों में लिख रही हैं. वह पाकिस्तान के श्रेष्ठ समाचार पत्रिका ‘द हेरल्ड’ की मुख्य संपादक भी बनीं.

1999 में उन्होंने राजनीति में क़दम रखा और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सदस्य बनीं. साल 2002 में वो संसद के निचले सदन राष्ट्रीय असेंबली की सदस्य बनीं.

वर्ष 2008 के आम चुनावों के बाद पीपुल्स पार्टी के गठबंधन वाली सरकार में उन्होंने केंद्रीय सूचना मंत्री का पद संभाला और पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के चलते 2009 में अपने पद से इस्तीफ़ा दिया.

उन्होंने संसद में मानवाधिकारों के मुद्दों पर खुल कर बात की और महिलाओं के अधिकारों के लिए क़ानून पारित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.

'ईश-निंदा क़ानून का विरोध'

उन्होंने इज़्ज़त के नाम पर हत्या, घरेलू हिंसा और मीडिया की स्वतंत्रता के लिए ज़बरदस्त अभियान चलाया और उसी दौरान उन्होंने बेनज़ीर भुट्टो के साथ काफ़ी क़रीब रह कर काम किया.

2009 में केंद्रीय सूचना मंत्री का पद छोड़ने के बाद उन्होंने राहत संस्था पाकिस्तान रेड क्रिसेंट और विचार मंच जिन्ना इंस्टीट्यूट के लिए काम करना शुरू किया.

2010 में उन्होंने पाकिस्तान के विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून में संशोधन के लिए संसद में एक बिल पेश किया, जिसका धार्मिक दलों ने कड़ा विरोध किया.

पहली बार सुरक्षा कारणों से वह कराची स्थित अपने घर में सीमित रहीं.

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