पाकिस्तान की आज़ादी और संप्रभुता का सम्मान हो: चीन

हू जिंताओ और गिलानी (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption पाकिस्तान और चीन ने पहले भी मज़बूत रिश्तों का प्रदर्शन किया है और मई में गिलानी बीजिंग गए थे

चीन ने पाक-अफ़ग़ान सीमा पर नेटो हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने पर चिंता जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान की आज़ादी, संप्रभुता और एकता का सम्मान होना चाहिए.

शनिवार तड़के पाक-अफ़ग़ान सीमा पर मोहमंद में नेटो के हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमान हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस हमले पर अफ़सोस जताया है लेकिन पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान को जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया है जिनसे नेटो सेनाओं के लिए फ़ौजी और अन्य सामान की आपूर्ति होती है.

इसके बाद पाकिस्तान, अमरीका और अमरीका के नेतृत्व वाली नेटो फ़ोजों की ओर से लगातार स्पष्टीकरण और बयानबाज़ी का दौर चला हुआ है.

ताज़ा घटनाक्रम में चीन के विदेश मंत्री यांग जीची और पाकिस्तानी विदेश मंत्री हीना रब्बानी खर के बीच फ़ोन पर 40 मिनट की बातचीत हुई और इसके बाद चीन ने इस मामले पर बयान दिया.

चीन ने इस विषय में न केवल अपनी चिंता ज़ाहिर की है बल्कि इसकी गंभीर और व्यापक जाँच की भी मांग की है.

ग़ौरतलब है कि अमरीका और नेटो के इस बारे में अफ़सोस जताने के बावजूद पाकिस्तान का पूरे मसले पर रुख़ कड़ा है.

'रिश्ता सम्मान पर आधारित हो'

पाकिस्तान ने कहा है कि पाक-अफ़ग़ान सीमा पर मोहमंद में शनिवार तड़के 24 पाकिस्तानी सैनिकों के नेटो हमले में मारे जाने के बाद अमरीका से 'बिज़नेस एज़ यूयूअल' यानी सामान्य कामकाज नहीं हो सकता है और राष्ट्र को संतुष्ट करने के लिए और क़दम उठाने पड़ेंगे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए इंटरव्यू में ये विचार व्यक्त किए हैं.

पाक-अमरीका सैन्य गठबंधन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये चल सकता है लेकिन आपसी सम्मान और हित के आधार पर ही ऐसा हो सकता है.

उनका कहना था, "यदि मैं अपने देश की संप्रभुता की रक्षा नहीं कर सकता तो हम कैसे कह सकते हैं कि रिश्ते आपसी सम्मान और हित पर आधारित हैं."

शनिवार को भी गिलानी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला बताया था.

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि पिछले तीन सालों में अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के आठ हमलों में 72 सैनिक मारे गए हैं और 250 से ज़्यादा घायल हो चुके हैं.

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, "हम समझते हैं कि इस बार नेटो सेना ने जो हमला किया है, उसके गंभीर परिणाम निकल सकते हैं."

चीन का पाक को संकेत?

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "चीन इन घटनाओं से बेहद चिंतित है. चीन पीड़ितों के बारे में चिंता और इस घटना पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करता है. चीन मानता है कि पाकिस्तान की आज़ादी, संप्रभुता और एकता का सम्मान होना चाहिए. इस घटना की अच्छे तरीके से व्यापक जाँच होनी चाहिए."

ग़ौरतलब है कि हाल में पाकिस्तान और चीन ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता और आजकल डिकिन्सन कॉलेज में प्रोफ़ेसर पीजे क्रॉली ने ब्रितानी अख़बार द गार्डियन से कहा, "चीन इसे (इस घटना को) एक अवसर को तौर पर देखता है."

उनका कहना था, "एक तो वह अमरीका को एहसास दिलाना चाहता है और दूसरा वह पाकिस्तान को संकेत देना चाहता है कि यदि अमरीका के उसके संबंध बहुत ख़राब हो जाते हैं तो उसके पास विकल्प है."

'पाक से रिश्ता हमारे हित में'

उधर अमरीका राष्ट्रपति के कार्यालय ने राष्ट्रपति ओबामा की ओर से इस घटना पर अफ़सोस जताया है.

इसे एक दुखद घटना बताते हुए व्हाइट हाउस प्रवक्ता जे कार्नी ने कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा मृतक सैनिकों के परिवारों के प्रति और पाकिस्तान जनता के प्रति भी को संवेदना व्यक्त करते हैं.

जे कार्नी का कहना था, "राष्ट्रपति की भी वही प्रतिक्रिया है जो हमारी है कि ये बहुत दुखद घटना है. किसी भी जान का नुकसान एक दुखद बात है. हमें पाकिस्तानी सेना के बहादुर सदस्यों के मारे जाने पर अफ़सोस है और हम उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. पाकिस्तान के साथ हमारा रिश्ता महत्वपूर्ण सहयोगी रिश्ता है जो पेचीदा भी है. ये अमरीका के हित में है कि वह पाकिस्तान के साथ सहयोग का रिश्ता रखे क्योंकि आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में हमारे हित एक जैसे हैं."

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