हक़्क़ानी के विदेश जाने पर प्रतिबंध

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Image caption सुप्रीम कोर्ट कथित ज्ञापन मामले की जाँच के लिए दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है

पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ की ओर से दायर याचिका पर ये आदेश दिया है.

पिछले दिनों हुसैन हक़्क़ानी पर आरोप लगे थे कि उन्होंने वरिष्ठ अमरीकी सैनिक अधिकारी एडमिरल माइक मलेन को एक गुप्त संदेश लिखकर पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमरीका से 'मदद की गुहार' लगाई थी.

विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने अदालत में याचिका दायर की थी कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच की जाए.

अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि वह हुसैन हक़्क़ानी के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा दे और अगर वे विदेश जाते हैं तो विदेश और गृह सचिव उस के लिए ज़िम्मेदार होंगे.

अदालत ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी, सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी, ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शुजा पाशा और वरिष्ठ अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का भी आदेश दिया है.

'जाँच अदालत करे'

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ख़ुद अदालत में पेश हुए और उन्होंने अदालत से कहा कि वे लोकतंत्र के समर्थक हैं और संसद ने कई अहम प्रस्तावों को पारित किया है लेकिन उस पर कभी भी अमल नहीं हुआ है इसलिए उन्होंने इस मामले की जाँच के लिए अदालत से अनुरोध किया है.

कथित ज्ञापन विवाद के बाद प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने स्पष्टीकरण के लिए हुसैन हक़्क़ानी को इस्लामाबाद तलब किया था.

लेकिन बाद में हक़्क़ानी ने राजदूत के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने हुसैन हक़्क़ानी से इस्तीफ़ा तलब किया जिससे कथित ज्ञापन की निष्पक्ष जाँच की जाए सके.

'विदेश नहीं जा रहा हूँ'

दूसरी ओर पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने कहा है कि वे पाकिस्तान इसलिए नहीं गए थे कि उन पर लगे आरोप की जाँच के बिना वे विदेश चले जाएँ.

उन्होंने सोशल नेटवर्किंग वेबासाईट ट्विटर पर लिखा है, “मैंने इसलिए इस्तीफ़ा दिया कि कोई भी व्यक्ति राजदूत की हैसियत से अपने देश का नेतृत्व नहीं कर सकता अगर उनका मीडिया ट्राइल हो रहा हो.”

हुसैन हक़्क़ानी, राष्ट्रपति भवन और पाकिस्तानी सरकार उन आरोपों का खंडन कर चुके हैं और सरकार ने इस मामले की जाँच संसद की सुरक्षा समिति को सौंप दी है.

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