पाक: नेटो से 'सड़क के इस्तेमाल' का मुआवज़ा

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Image caption अफग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सेना के लिए पाकिस्तान से सामान भेजा जाता है.

पाकिस्तान के केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अरबाब आलमगीर ख़ान ने कहा है कि अफग़ानिस्तान में नेटो सेना के लिए सामानों की आपूर्ति के लिए पाकिस्तान की सड़कों के इस्तेमाल से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है जिससे मुल्क को क़रीब एक अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.

पाकिस्तान नेटो से इस नुकसान की भरपाई चाहता है.

अरबाब आलमगीर ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसके लिए नेटो सेना से मुआवज़ा मांगा है और उम्मीद है कि जल्द ही उसका कोई नतीजा निकलेगा.

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ने संसद के ऊपरी सदन सीनेट में मुस्लिम लीग (क्यू) के सांसद और पूर्व सूचना मंत्री तारिक़ अज़ीम के सवाल के जवाब में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सेना को सामान की आपूर्ति करने वाले वाहनों की वजह से उसकी सड़कों को 40 अरब रुपए का नुक़सान हुआ है.

नेटो को पत्र

उन्होंने कहा कि इस नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए सरकार ने नेटो सेना को एक पत्र लिखा है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.

मंत्री ने बाद में बीबीसी संवददाता ऐजाज़ महर से बातचीत में कहा कि नेटो को रसद पहुँचाने वाले वाहन पाकिस्तान में तीन सड़कों का इस्तेमाल कर चमन और तोरख़म के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान जाते हैं.

उनके मुताबिक़ दो साल पहले जब सर्वेक्षण किया गया तो पता चला कि आठ वर्षों में नेटो और अमरीका के लिए सामान की आपूर्ति की वजह से पाकिस्तानी सड़कों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है जिसकी वजह से एक अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है.

उन्होंने नेटो सेना से मुआवज़ा मांगे जाने की बात भी कही.

एक दूसरे सवाल के जवाब में अरबाब आलमगीर ख़ान ने बताया कि इस बात की उनको कोई जानकारी नहीं है कि नेटो और अमरीका के साथ इस मामले को लेकर कोई समझौता है या नहीं.

विरोध

उनके मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो और अमरीका के लिए प्रतिदिन तीन से चार सौ कंटेनर पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाते हैं.

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को नेटो सेना के हैलिकॉप्टरों ने पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े मोहम्मद एजेंसी में पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया था जिसमें 24 सैनिक मारे गए थे.

पाकिस्तानी सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया था और नेटो सेना को सामान की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी, जो अभी भी बरक़रार है.

सरकार ने नेटो और अमरीका के साथ सहयोग की नीति पर पुनर्विचार करने की बात कही थी. गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया था कि पुनर्विचार की प्रक्रिया जारी है.

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