नेटो हमले की जाँच में कई प्रश्नः गिलानी

यूसुफ़ रज़ा गिलानी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption नेटो हमले के बाद से पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि 26 नवंबर को पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हुए हमले की जाँच से कुछ चिंताजनक प्रश्न सामने आए हैं और नेटो और अमरीका की ओर से हो रही हमले की जाँच से इसके जवाब मिलने चाहिए.

उन्होंने यह बात नेटो हैलिकॉप्टरों की ओर से पाकिस्तानी चौकियों पर किए गए हमले के बाद बिगड़ी हुई स्थिति पर विचार करने के लिए बुलाए गए राजदूत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही.

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह क्षेत्र गंभीर दौर से गुज़र रहा है और अफ़ग़ान मुद्दे के हल के लिए ख़ास तौर पर इस क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि सभी देशों को अफ़ग़ानिस्तान की शांति और स्थिरता के लिए मिल कर काम करने की ज़रुरत है और अफ़ग़ानिस्तान की शांति के लिए पाकिस्तान का सहयोग हमेशा जारी रहेगा.

प्रधानमंत्री के मुताबिक़ 26 नवंबर को पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हुए हमले ने अफ़ग़ानिस्तान की शांति और स्थिरता के लिए हो रही कोशिशों को नुक़सान पहुँचाया है.

विदेश नीति

बैठक से पहले विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "हम राष्ट्रीय हित और अहम उद्देश्यों की रोशनी में अपनी विदेश नीति तैयार करेंगे ताकि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा की जा सके."

उन्होंने बताया कि विदेश नीति पर पुनर्विचार करने के लिए राजदूत सम्मेलन की ओर से जो भी प्रस्ताव सामने आएँगे, वह संसद की राष्ट्रीय समिति को पेश किए जाएँगे और वही उस पर फ़ैसला लेगी.

नेटो हमले के बाद विदेश नीति पर पुनर्विचार करने के लिए करीब 15 देशों में नियुक्त पाकिस्तान के राजदूतों का दो दिवसीय सम्मेलन बुलाया गया था. सम्मेलन की अंतिम बैठक में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने भी भाग लिया.

इस सम्मेलन की पहली बैठक में सोमवार को हुई थी जिसमें अमरीका, ब्रिटेन, अफ़ग़ानिस्तान, भारत और सऊदी अरब सहित 15 देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों ने भाग लिया.

सम्मेलन को ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख अहमद शूजा पाशा ने भी अपनी बात रखी थी. विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि उन्होंने इस बैठक में क्या कहा.

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को नेटो हैलिकॉप्टरों ने क़बायली इलाक़े मोहमंद एजेंसी में पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हमला किया था, जिसमें 24 सैनिक मारे गए थे और 15 अन्य घायल हो गए थे.

पाकिस्तानी सरकार ने इस हमले की कड़ी आलोचना की थी और नेटो और अमरीका के साथ आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में सहयोग की नीति पर पुनर्विचार करने का फ़ैसला लिया था.

संबंधित समाचार