'रोक के बावजूद ज़रुरी सामग्री मौजूद है'

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Image caption पाकिस्तान सेना पर हमले के विरोध में क्वेटा में कुछ अज्ञात लोगों ने नेटो वाहनों को आग लगा दी थी.

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो गठबंधन के प्रवक्ता लैफ़्टिनेंट कर्नल जिमी कमिंग्ज़ ने कहा है कि पाकिस्तान से खाद्य और अन्य सामग्री की आपूर्ति पर रोक के बावजूद भी उनके पास ज़रुरत की सामग्री मौजूद है.

उन्होंने बीबीसी को एक ईमेल भेज कर यह जानकारी दी है.

जब उनसे ये सवाल किया गया कि पाकिस्तान की ओर से नेटो और अमरीकी सेना के लिए सामान की आपूर्ति पर रोक के बाद खाद्य और अन्य सामग्री की कमी तो नहीं है, इस पर उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत सामग्री मौजूद है और किसी संकट का सामना नहीं है और हमारे पास सामग्री पहुँचने के दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं.”

नेटो गठबंधन के प्रवक्ता का कहना था कि सेंट्रल कमांड और थियेटर कमांडरों के सामान की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ते को महत्व दिया जाता है. जैसा कि नॉर्दर्न डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (मध्य ऐशियाई देशों से रसद के रास्ते) और अन्य रास्ते है.

जब उनसे पूछा गया कि अब तक पाकिस्तान को नेटो और अमरीका कर की मद में कितनी रक़म दे चुका है तो उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील है इसलिए इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती है.

'कोई समझोता नहीं'

उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि अमरीका और नेटो का सीधे तौर पर पाकिस्तानी सरकार से सामान आपूर्ति को लेकर कोई समझौता नहीं है. लेकिन ब्रिटेन ने एक समझौता किया है जिस के तहत यह आपूर्ति होती है.

ग़ौरतलब है कि 26 नवंबर को नेटो विमानों ने क़बायली इलाक़े मोहमंद एजेंसी में पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हमला किया था, जिसमें 24 सैनिक मारे गए थे और 15 अन्य घायल हो गए थे.

पाकिस्तानी सरकार ने इस का कड़ा विरोध किया था और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो और अमरीकी सेना के लिए सामान की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी.

पाकिस्तानी सरकार ने अमरीका सेना के इस्तेमाल में बलूचिस्तान स्थित शम्सी ऐयरबेस को भी ख़ाली करवाया था और आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में सहयोग की नीति पर पुनर्विचार करने का फ़ैसला लिया था.

'नेटो वाहनों से नुक़सान'

अमरीका ने गत रविवार को शम्सी ऐयरबेस ख़ाली कर दिया था और उसके पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले कर दिया था.

विदेश मंत्रालय ने अमरीका और नेटो से आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में सहयोग पर पुनर्विचार करने का मामला संसद की सुरक्षा समिति को भेज दिया है.

कुछ दिन पहले पाकिस्तान के केंद्रीय दूरसंचार मंत्री डॉ. अरबाब आलमगीर ने बीबीसी को बताया था कि अमरीका और नेटो के लिए प्रतिदिन साढ़े तीन सौ वाहन अफ़ग़ानिस्तान जाते हैं.

उनके मुताबिक़ नेटो वाहनों की वजह से पाकिस्तान को हर साल 20 से 25 अरब रुपय का घाटा हो रहा है.

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