सेनाध्यक्ष के बयान से बेहतरी आएगी: गिलानी

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Image caption 'मेमोगेट' प्रकरण के बाद पाकिस्तान की राजनीति में काफ़ी बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पहली बार सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी की ओर से लोकतंत्र के समर्थन में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनके स्प्ष्टीकरण की प्रशंसा की गई है.

इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गिलानी ने कहा, “लोकतंत्र के उल्लेख में सेनाध्यक्ष ने कल(शुक्रवार) जो स्प्ष्टीकरण दिया था, उसकी प्रशंसा हो रही है और इससे बेहतरी आएगी.”

एक पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि कथिक मेमो विवाद पर सरकार का घेरा तंग होता जा रहा है और यह अफ़वाहें सामने आ रहीं हैं कि प्रधानमंत्री जल्द इस्तीफ़ा देंगे, उन्होंने कहा, “हम कोई काम छिप कर नहीं करेंगे और जो भी होगा वह सामने आ जाएगा.”

उन्होंने आगे कहा कि अफ़वाहों का मौसम मार्च में ख़त्म हो जाएगा.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी सरकार और सेना में बढ़ते तनाव के बीच सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ कियानी ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा था कि तख़्तापलट की ख़बरें गुमराह करने वाली है.

सेना की वेबासाइट पर जारी बयान के मुताबिक़, "सेना को अपनी संवैधानिक दायित्वों को पूरा बोध है. तख़्तापलट की बातें केवल अफ़वाहें हैं ताकि असल मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके.सेना सत्ता नहीं हड़पना चाहती."

'अदालत पर भरोसा'

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने तख़्तापलट की किसी आशंका से इनकार किया था.

मेमोगेट प्रकरण पर याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, “लोग निश्चिंत रहें. सेना के सत्ता पर काबिज़ होने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि अब लोगों को कोर्ट पर भरोसा है.”

एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने संसद में आरोप लगाया था कि ‘कुछ लोग’ सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र रच रहे हैं.

उन्होंने किसी भी संस्था का नाम नहीं लिया था लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा सेना और आईएसआई की तरफ़ था.सुप्रीम कोर्ट में नौ जजों का पैनल इस याचिका पर विचार कर रहा है कि क्या मेमोगेट प्रकरण की जांच होनी चाहिए.पाकिस्तान में चार बार सेना का शासन रह चुका है.

मेमोगेट विवाद उस 'मेमो' या चिट्ठी से शुरु हुआ था जिसमें अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने अमरीकी सैन्य अधिकारियों को कथित रूप से गुप्त ज्ञापन भेजा था. इसमें अमरीका से पाकिस्तानी सेना की ताक़त को कम करने के लिए कहा गया था.

पाकिस्तान के नेता कथित तौर पर इस बात से चिंतित थे कि ऐबटाबाद में अमरीकी सुरक्षा बलों के ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद सेना तख़्तापलट करने वाली है.

मेमोगेट के बाद से ही सेना और सरकार के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल में ही राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के अचानक दुबई जाने से अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

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