सवाल पीपुल्स पार्टी के भविष्य पर

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Image caption बेनज़ीर भुट्टो की चार साल पहले हत्या कर दी गई थी

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की चौथी बरसी पूरे देश में मनाई जा रही है जबकि उनका राजनीतिक दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इन दिनों भारी संकट का सामना कर रहा है.

दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक चुनावी सभा के दौरान हुए एक आत्मघाती हमले में बनेज़ीर भुट्टो की मौत के बाद पीपुल्स पार्टी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है और पिछले चार सालों के दौरान सरकार लगातार संकटों का सामना कर रही है.

पार्टी का नेतृत्व बनेज़ीर भुट्टो के पति और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी कर रहे हैं जो स्वयं पार्टी के सह-अध्यक्ष भी हैं और अध्यक्ष का पद उनके बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी के पास है.

अधिकतर जानकार मानते हैं कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को ख़तरों से खेलना अच्छा लगता है इसलिए पिछले चार सालों के दौरान उन्होंने भारी संकट के बीच सरकार का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है.

पिछले दिनों कथित मेमो विवाद सामने आने के बाद सरकार और सेना के बीच संबंधों में काफ़ी तनाव बढ़ गया है, जिसके बाद सरकार अपने कार्यकाल का सबसे बड़ा संकट झेल रही है और अब राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के नेतृत्व में पीपुल्स पार्टी के भविष्य पर कई सवाल उठ रहे हैं.

फ़र्क़

पीपुल्स पार्टी को क़रीब से देखने वाले और जाने-माने विश्लेषक जीएन मुग़ल कहते हैं कि जिस तरह ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो और बेनज़ीर भुटटो ने पार्टी को संभाला और चलाया और जिस तरह आसिफ़ अली ज़रदारी चला रहे हैं, उसमें बहुत बड़ा फ़र्क़ है.

उन्होंने कहा, “ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो जब पार्टी के अध्यक्ष थे तो उस समय वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते थे और उनकी आलोचना सुनते थे. बनेज़ीर भुट्टो भी ऐसा ही करती थीं और इससे नेता और कार्यकर्ता के बीच विश्वास बढ़ जाता था, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं हो रहा है.”

उनके मुताबिक़ ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो राजनीति को ड्रॉइंग रूम से निकाल कर जनता की ओर ले गए और बनेज़ीर भुट्टो ने भी जनता से रिश्ता नहीं तोड़ा जबकि अब पीपुल्स पार्टी ड्रॉइंग रुम तक सीमित रह गई है.

उन्होंने बेनज़ीर भुट्टो के हत्यारों को सज़ा न दिलवाने पर पीपुल्स पार्टी की वर्तमान सरकार की भी कड़ी आलोचना की और कहा कि पिछले चार वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद बनेज़ीर के हत्यारों को सज़ा नहीं मिल पाई है जो बहुत बड़ा दुर्भाग्य है.

ग़ौरतलब है कि 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक चुनावी सभा में हुए आत्मघाती हमले में बनेज़ीर भुट्टो की मौत हो गई थी.

उनकी मौत को चार साल बीत चुके हैं लेकिन उनके हत्यारों को अभी तक सज़ा नहीं मिल पाई है हालांकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पिछले चार सालों से सत्ता में है.

'पाकिस्तान का दुर्भाग्य'

सिंधी अख़बार ‘आवामी आवाज़’ के संपादक और पीपुल्स पार्टी के जानकार क़ासिम राजपर ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पार्टी संस्थापक ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो की मौत के बाद जनता ने पीपुल्स पार्टी से जो उम्मीदें लगाई थीं, वह किसी हद तक पूरी नहीं हो सकी.

उन्होंने कहा कि अब आसिफ़ अली ज़रदारी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और 2008 के आम चुनावों के बाद जनता को उम्मीद थी कि अब पीपुल्स पार्टी वही ग़लतियाँ नहीं करेगी जिसकी वजह से अतीत में उसको नुक़सान उठाना पड़ा.

उन्होंने कहा, “बड़ा दुर्भाग्य पाकिस्तान के लिए है और उससे बड़ा दुर्भाग्य पीपुल्स पार्टी के लिए है कि वही ग़लतियाँ न सिर्फ़ दोहराई गईं बल्कि उससे ज़्यादा बड़ी ग़लतियाँ की गईं. सिंध प्रांत पीपुल्स पार्टी का गढ़ है और उसी प्रांत में शासन प्रणाली सबसे ज़्यादा कमज़ोर है. कहने का मतलब यह कि सरकार ने जनता के लिए कुछ किया ही नहीं है.”

उनके मुताबिक़ प्रांत में चार लोग अपने आप को मुख्यमंत्री मानते हैं जिनमें से दो राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के क़रीबी रिश्तेदार हैं और सैयद क़ायम अली शाह केवल नाम के मुख्यमंत्री हैं.

क़ासिम राजपर कहते हैं, “पीपुल्स पार्टी शायद यह अभी तक तय नहीं कर पाई है कि लोकतंत्र का काफ़िला कहाँ जा रहा है और उसका नेतृत्व कौन कर रहा है? मैं समझता हूँ कि सेना तय कर चुकी है कि पीपुल्स पार्टी सत्ता में बनी रहे ताकि वह और ग़लतियाँ करे क्योंकि पार्टी को राजनीतिक तौर पर ख़त्म करने की कोशिश हो रही है.”

वह मानते हैं कि पीपुल्स पार्टी कभी कमज़ोर हुई है तो उसमें सेना की भूमिका इतनी ज़्यादा नहीं है जिनती उनकी अपने नेतृत्व की ग़लतियाँ हैं.

उनका कहना है, “पीपुल्स पार्टी को ख़त्म करने के लिए जो काम जनरल ज़िया नहीं कर सके और जो काम दूसरे सैन्य शासक नहीं सके, वही काम पार्टी का नेतृत्व कर रहा है. जब घर का भेदी ख़ुद ही लंका ढाएगा तो बाहर वाला आपको कैसे बचा सकता है.”

क़ासिम राजपर के मुताबिक़ पीपुल्स पार्टी अपने ऐतिहास के सबसे बड़े संकट से गुज़र रही है इसलिए अब उसके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं.

अब देखना यह है कि पीपुल्स पार्टी अपने भविष्य को ओर सुरक्षित करने के लिए किसी तरह की रणनीति तैयार करती है.

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