'सभी सरकारी कर्मचारी संपत्ति सार्वजनिक करें'

यूसुफ़ रज़ा गिलानी (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फ़ैसला लिया गया.

पाकिस्तानी सरकार ने न्यायधीशों और सैन्य अधिकारियों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजानिक करने के निर्देश दिए हैं.

बुधवार को प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया और इस संबंध में क़ानून में संशोधन करने का भी फ़ैसला लिया गया.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़िरदौस आशिक़ आवाण ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि यह फ़ैसला किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि राजनेताओं के साथ-साथ सबकी जवाबदेही तय करने के लिए किया गया है.

सूचना मंत्री ने बताया कि संसद के सत्र में ‘सिविल सर्विसेज़ ऐक्ट’ में संशोधन के लिए दो प्रस्ताव सामने आए थे और वही प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजे गए थे, जिसमें से एक प्रस्ताव को मंज़ूर किया गया.

उन्होंने कहा कि नेताओं के साथ-साथ सरकार राजस्व से वेतन लेने वाले सभी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजानिक करने का कहा गया है.

सरकार ने यह फ़ैसले ऐसे समय में लिया है जब कथित मेमो विवाद पर सरकार के सेना और न्यायपालिका के साथ मतभेद चल रहे हैं. प्रधानमंत्री ख़ुद यह कहते रहे हैं कि नेताओं को भ्रष्ट कहा जाता है लेकिन क्या सैन्य शासक भ्रष्ट नहीं होते.

ग़ौरतलब है कि अमरीकी अधिकारियों को कथित तौर पर भेजे गए गुप्त संदेश के मामले पर सरकार और सेना के बीच इन दिनों संबंधों में काफ़ी तनाव है.

मेमोगेट विवाद उस 'मेमो' या चिट्ठी से शुरु हुआ था जिसमें अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने अमरीकी सैन्य अधिकारियों को कथित रूप से गुप्त ज्ञापन भेजा था. इसमें अमरीका से पाकिस्तानी सेना की ताक़त को कम करने के लिए कहा गया था.

यह मामला सामने आने के बाद प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अमरीका में अपने राजदूत हुसैन हक़्क़ानी को इस्लामाबाद बुलाया था, उसके बाद हक़्क़ानी ने पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया था.

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