शनिवार को मिल सकते हैं गिलानी-कियानी

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Image caption बढ़ते तनाव को कम के लिए रक्षा समिति की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने नागरिक सरकार और सेना के बीच बढ़ते तनाव के चलते शनिवार को मंत्रिमंडल की रक्षा समिति की बैठक बुलाई है.

यह बैठक प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अध्यक्षता में होगी, जिसमें सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी, विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, गृह मंत्री रहमान मलिक सहित वरिष्ठ मंत्री और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे.

हाल ही में सरकार और सेना के बीच पैदा हुए तनाव के बाद ये पहला मौक़ा होगा जब प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष आमने सामने होंगे.

इस बीच राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी दुबई चले गए हैं. हालांकि कहा गया है कि वे एक शादी में शामिल होने के लिए दुबई गए हैं और एक दिन बाद लौट आएंगे.

अहम बैठक

कैबिनेट डिविज़न के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने रक्षा समिति की बैठक बुधवार को तलब की थी, लेकिन सेना की ओर से उनके ख़िलाफ़ बयान जारी किए जाने के बाद उसे स्थागित कर दिया गया था.

नागरिक सरकार और सेना के बीच बढ़ते तनाव के चलते जानकारी इस बैठक को महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि यही मंच है, जहाँ सरकार और सेना सीधे तौर पर किसी मुद्दे पर चर्चा करती हैं.

पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान यह पहला मौक़ा होगा जब पाकिस्तान का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व एक ही मंच पर साथ होगा.

सूत्रों के मुताबिक़ रक्षा समिति की बैठक में 26 नवंबर को नेटो हेलिकॉप्टरों की ओर से पाकिस्तानी चौकियों पर हुए हमले के बाद की स्थिति पर विचार विमर्श किया जाएगा.

बताया जा रहा है कि उस बैठक में सरकार और सेना के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव पर भी बातचीत होने की संभावना है.

तनाव

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Image caption गिलानी को बुधवार को सेना से सार्वजनिक रुप से चेतावनी दी थी

ख़बरें हैं कि सेना ने सरकार को संदेश दिया है कि वह सत्ता पर कब्ज़ा नहीं करना चाहती है लेकिन सरकार को भी सेना की आलोचना नहीं करनी चाहिए.

ताज़ा संकट उस समय शुरु हुआ जब सेना ने बुधवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के उस इंटरव्यू पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने मेमो विवाद के मामले में सेनाध्यक्ष और आईएसआई के प्रमुख की ओर से जवाब पेश करने को ग़ैरक़ानूनी बताया था.

बुधवार को सेना ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने सेनाध्यक्ष और आईएसआई के प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी थी कि इस तरह के आरोपों से देश को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

उसके कुछ घंटों बाद प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पद का दुरुपयोग करने के आरोप में केंद्रीय रक्षा सचिव को उनके पद हटा दिया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से एक बयान में कहा गया था कि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने लेफ्टीनेंट जनरल (रिटायर्ड) नईम ख़ालिद लोधी को पद से हटा दिया है.

उन पर आरोप थे कि उन्होंने अपने पद पर रहते हुए कुछ ऐसे क़दम उठाए जिससे सरकारी विभागों के बीच ग़लतफहमियाँ पैदा हुईं.

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