भारत हमेशा शोर मचाता है: हाफिज़ सईद

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पाकिस्तान में सक्रिय संगठन 'जमात उद दावा' ने फ़रवरी 2012 में बीबीसी से बातचीत में कहा था कि पाकिस्तान में कोई चरमपंथी नहीं है और न भारत के पास इसका कोई सबूत है लेकिन अफ़सोस है कि कुछ भी होता है तो पाकिस्तान पर आरोप मढ़ दिया जाता है. हाफ़िज़ सईद से यह बातचीत इस्लामाबाद में तात्कालिक बीबीसी संवाददाता हफ़ीज चाचड़ ने की थी. हफ़ीज़ चाचड़ फिलहाल बीबीसी से संबद्ध नहीं हैं.

हाफ़िज़ सईद ने तब कहा था कि भारत को कश्मीर से अपना फौज़ी क़ब्ज़ा छोड़ना चाहिए और अगर भारत कश्मीर छोड़ दे तो सारे मसले हल हो सकते हैं.

सईद ने भारत को सर्वाधिक वरीयता वाले देश का दर्ज़ा दिए जाने के पाकिस्तान के फ़ैसले की भी आलोचना की थी और कहा कि इससे पाकिस्तान को नुक़सान होगा.

हाफ़िज़ सईद से तब हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर आपकी क्या राय है. क्या बातचीत नहीं होनी चाहिए.

बातचीत का हम भी समर्थन करते हैं और मुद्दों को सुलझाने के लिए मिल कर बैठना चाहिए, नतीजे पर पहुँचना चाहिए यह बात बहुत ज़रूरी है लेकिन भारत का रवैया बहुत की आक्रामक है. कश्मीर में केवल उन्होंने फौजी कब्ज़ा किया हुआ था, इस वक़्त तो भारत ने कश्मीर को जंगी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. बातचीत ज़रूरी है लेकिन भारत ऐसा क़दम उठाए जिससे लगे कि वह पाकिस्तान का दुश्मन नहीं बल्कि उसका दोस्त है. बातचीत होनी चाहिए लेकिन सब मुद्दों पर और भारत तो कश्मीर पर बात नहीं करता है. मैं समझता हूं कि भारत के पास वह शक्ति और हिम्मत नहीं है कि वह कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत करे.

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तो क्या बातचीत नहीं होनी चाहिए.

हम भी चाहते हैं दोनों देशों के संबंध बेहतर हों और हम भी लड़ाई के समर्थन में नहीं है क्योंकि लड़ने से कोई समस्या हल नहीं होती है. भारत कश्मीर को क्यों नहीं छोड़ता, आख़िर वजह क्या है? क्या आज़ादी उनका हक़ नहीं है?

तो फिर मसले कैसे खत्म होंगे.

भारत कश्मीर छोड़ दे मसले ख़त्म हो जाएंगे. अगर भारत अपना फ़ौजी कब्ज़ा जारी रखेगा और हिंसा का रास्ता लेगा तो पाकिस्तान उसके हर कदम को स्वीकार नहीं करेगा. मुझे एक बात बताएं कि भारत के किसी हिस्से या इलाके पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा किया है क्या? नहीं किया.

भारत का कहना है कि पाकिस्तान घुसपैठ करता है.

भारत हमेशा दुष्प्रचार करता और शोर मचाता रहा है. अगर वह घुसपैठ की बात करता है तो सरबजीत सिंह कहां से आया था, पाकिस्तान में सैकड़ों ऐसे मामले सामने आए हैं और कई भारतीय जेलों में बंद हैं, जिन्होंने माना है कि उन्होंने अवैध रूप से सीमा पार की थी. मैं यह समझता हूँ कि अगर कश्मीर के लोग एक दूसरे के पास आते हैं और जाते हैं तो यह घुसपैठ बिल्कुल नहीं है क्योंकि वह अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं है बल्कि नियंत्रण रेखा है. मैं इसको

घुसपैठ नहीं मानता हूँ क्योंकि कश्मीर एक है. घुसपैठ तो वह है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में किया था और फिर पूर्वी हिस्से को पाकिस्तान से अलग कर दिया.

भारत बार बार कहता रहा है कि पाकिस्तान से चरमपंथी हमले होते हैं.

पाकिस्तान में कोई आतंकवादी नहीं है, न इसकी कोई हक़ीक़त है और न भारत के पास इसका कोई सबूत है. लेकिन अफसोस है कि जो कुछ भी होता है तो पाकिस्तान पर आरोप लगा दिया जाता है. पाकिस्तान में ऐसा कोई संगठन नहीं है जो भारत पर हमला करे. भारत को अपना रैवया ठीक करना चाहिए. भारत अपने आंतरिक मामलों पर ध्यान दे.

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मुंबई हमलों के बारे में क्या कहेंगे

भारत ने मुंबई हमलों के संबंध में चार बार सबूत भेजे हैं, जब वह यहाँ आए तो पाकिस्तान की अदालतों में वह सब कुछ पेश किया गया. करीब छह महीने तक लाहौर हाईकोर्ट में यह मामला चलता रहा और अदालत ने फ़ैसला किया कि पाकिस्तान की कोई संस्था इसमें लिप्त नहीं है और जमात-उद-दावा का इसमें कोई हाथ नहीं है. अदालत ने मेरा और मेरे साथियों का नाम ले कर हमको उस मुकदमे से बरी कर दिया और अदालत ने कहा कि भारत के सभी सबूत अदालत में पेश करने के काबिल नहीं हैं.

पाकिस्तान ने भारत को सर्वाधिक वरीयता वाले देश का दर्जा दिया है.

भारत को सर्वाधिक वरीयता वाले देश का दर्जा दे कर पाकिस्तान को मंडी बनाने की कोशिश की जा रही है. इस पर भी हमें बहुत चिंता हैं कि क्योंकि वह सामान्य व्यापार का मामला नहीं है. पाकिस्तान के अंदर से उसके कंटेनर गुज़रेंगे और अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँचने का उसके लिए रास्ता बनाया जा रहा है और पाकिस्तान को केवल एक रास्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. हम समझते हैं कि अगर यह मामला इस तरह रहा तो यह पाकिस्तान की संप्रभुता के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.

लेकिन इससे तो पाकिस्तान को भी लाभ होगा.

मैं नहीं समझता कि उसके पाकिस्तान को कोई फ़ायदा होगा क्योंकि मेरा पास आंकड़े मौजूद है कि पाकिस्तान के साथ भारत का अब तक का जो व्यापार हुआ है वह पाकिस्तान के लिए घाटे में रहा है और हमें इससे कोई फ़ायदा नहीं होगा. व्यापार अगर बराबरी की बुनियाद पर हो तो उसमें कोई आपत्ति नहीं है.

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पानी के मुद्दे पर भी आपको आपत्तियां रही हैं.

भारत पाकिस्तान का पानी रोक रहा है और पहले तो नदियों पर इतने बांध नहीं थे, अब तो 295 के करीब बांध बना रहा है. इससे भारत को आर्थिक रूप से फ़ायदा होगा जबकि पाकिस्तान को काफ़ी नुक़सान होगा क्योंकि पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र बुरी तरह तबाह हो जाएगा.

आपकी नाराज़गी अमरीका से भी रही है.

अमरीका और उसके सहयोगी देश हमारे लिए लगातार ख़तरा बने हुए हैं. पहले ड्रोन हमले किए गए और उसके बाद पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हमला किया और फ़िर ड्रोन का जारी रहना, हम समझते हैं कि यह चीज़ें बहुत बड़ी चिंता का विषय है और हम समझते हैं कि अमरीका का एजेंडा है कि वह पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर हमला करे और उसे परमाणु शक्ति छीन ले.

दूसरी ओर भारत ने हमेशा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ योजनाएं बनाईं, साज़िशें की, पूर्वी पाकिस्तान को अलग किया और पाकिस्तान में अपनी साज़िशें जारी रखीं ख़ासतौर पर 9/11 के हमलों के बाद जब अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में घुसा तो भारत को भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िशें करने का मौका मिला.

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