पाकिस्तान का 'गुमनाम' क्लब

मिनिस्ट्री ऑफ़ साउंड

जब हम पाकिस्तान के शहर लाहौर की ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर ड्राइव कर रहे थे तो उस वक़्त हमें ये बिल्कुल नहीं लग रहा था कि हमारा ये सफ़र एक अंतरराष्ट्रीय नाईट क्लब जाने के लिए हो सकता है.

रास्ते में हमें गधे-जुती गाड़ियां और साईकिल सवार दिखे. चारों तरफ़ घुप अंधेरा था और हमें पक्की तौर पर लग रहा था कि ड्राइवर ग़लत रास्ते पर निकल गया है.

तभी हमें आकाश के अंधेरे को भेदती हुई जामुनी रंग की तेज़ रोशनी दिखी. और फिर संगीत की तेज़ आवाज़ कानों में गुंजी.

हम वहां पहुंच चुके हैं. ये मिनिस्ट्री ऑफ़ साउंड है - यहां लाहौर झूम रहा है.

सैकड़ो की तादाद में प्रशंसक वहां जमा हैं.

सुरक्षा

पाकिस्तान में मिनिस्ट्री ऑफ़ साउंड का ये तीसरा कार्यक्रम है और सुरक्षा व्यवस्था काफ़ी कड़ी है.

इस आयोजन का कोई प्रचार नहीं किया गया था और आयोजन स्थल को गुप्त रखा गया था.

आयोजकों को डर था कि आयोजन को, जिसमें युवाओं के सम्मिलित होने की पूरी उम्मीद थी, चरमपंथी अपनी कारगुज़ारी का निशाना बना सकते हैं.

लाहौर को पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर देखा जाता है लेकिन इस तरह के नृत्य-संगीत के कार्यक्रम कभी-कभार ही होते हैं.

बाईस-साल की छात्रा मारिया कहती हैं, "यहां आकर हम जोखिम उठा रहे हैं."

"इसे इसलिए निशाना बनाया जा सकता है क्योंकि ऐसी चीज़ों को हेय दृष्टि से देखा जाता है ख़ासतौर पर एक इस्लामी देश में. हमें बताया जाता है कि डांस पार्टयों में जाना सही नहीं है लेकिन हम इसके ख़िलाफ़ जंग जारी रखेगे."

शराब

माया उन तक़रीबन 800 लोगों में से एक हैं जो लाहौर से कुछ घंटों की दूरी पर बसे इस क्लब में कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं.

फ़ार्म हाउस में एक बड़ा सा स्टेज तैयार कर दिया गया है. जिसके ऊपर एक बड़ा सा चेहरे का मॉडल है जिसने चश्मा पहन रखा है.

हालांकि एक चीज़ की कमी महसूस की जा सकती है - यहां कोई बार (मधुशाला) नहीं है. पाकिस्तान में शराब पर प्रतिबंध है.

बीस साल के आसपास के युवा मर्द-औरतें सफ़ेद सोफ़ों पर लेमोनेड या कोला के ग्लास लिए बैठे हैं. हो सकता है कि इनमें कुछ 'और' भी मिलाया गया हो.

लेकिन यहां बैठे युवा, देश के बड़े युवा वर्ग से भिन्न हैं.

ये अमीर हैं, शिक्षित हैं, और उनमें से काफ़ी देश के बाहर के विश्वविद्यालय जाकर शिक्षा हासिल कर चुके हैं.

सभ्यता

पाकिस्तान का एक बड़ा वर्ग इस तरह के आयोजनों को पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के तौर पर देखता है.

कई मामलों में पाकिस्तान एक रूढ़िवादी देश है.

दिसंबर में लाहौर की सड़कों पर हज़ारों लोगों ने जमा होकर ये मांग की थी कि पाकिस्तान अमरीका से सभी संबंधों को समाप्त कर ले और 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई' से ख़ुद को अलग करे.

लेकिन, 21-साल की सबा कहती है कि आज वो सब सोचने की रात नहीं है.

वह कहती हैं, "हमने इन सबपर ध्यान देना बंद कर दिया है. हम अपनी ज़िंदगी से मतलब रखते हैं. हालांकि ये दुखद है लेकिन हम कर ही क्या सकते है? ये उसी तरह है जैसे अगर आपके शरीर का कोई अंग ख़राब हो तो आपको उसके साथ जीना सीखना पड़ता है."

इकत्तीस साल की एज़ी स्टेज पर एक व्यक्ति के साथ नाच रहे हैं. एक शख़्श के चेहरे पर पेंट पुता है.

ग़लतफ़हमी

वो कहते हैं पाकिस्तान को लेकर दुनियां भर में ग़लतफ़हमियां हैं.

वो कहते हैं, "पाकिस्तान को एक ऐसे मुल्क के तौर पर जाना जाता है जहां आतंकवाद का ज़ोर है. लेकिन सच तो ये है कि हमें मौज मस्ती पसंद है, हमें शांति पंसद है और इस तरह के आयोजन इस बात का सबूत हैं."

कार्यक्रम में शामिल अधिकांशतर डीजे यहीं के हैं. इनमें से एक डीजे बैरिस्टर है - रात में संगीत प्रेमी, दिन में मशहूर वकील.

हालांकि आज के ख़ास आर्कषण हैं - हॉलैंड से संबंध रखने वाले डीजे सैंडर. उन्होंने विश्व भर में कार्यक्रम किए हैं लेकिन वो पाकिस्तान पहली बार आए हैं.

वो कहते हैं, "गीत-संगीत दुनियां भर में पसंद किया जाता है और मज़हब, राजनीतिक सोचों से कही परे ये दुनियां भर के युवाओं को क़रीब ला रहा है."

संबंधित समाचार