दबाव के बावजूद जारी रहेगी ईरान गैस परियोजना :पाकिस्तान

हिना रब्बानी खार(फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption नैटो हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे जाने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब होते जा रहें हैं.

पाकिस्तान ने कहा है कि विदेशी दबाव के बावजूद ईरान गैस पाइपलाइन परियोजना जारी रहेगी.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने गुरूवार को इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में ये बातें कहीं.

हिना रब्बानी खार का बयान एक अमरीकी सैन्य अधिकारी के बयान के ठीक बाद आया है. एक वरिष्ठ अमरीकी सैन्य अधिकारी ने कहा था कि ईरान-पाकिस्तान गैस परियोजना के कारण अमरीका प्रतिबंध लगा सकता है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि अमरीका से उसके संबंध एक दूसरे के सम्मान पर आधारित हों.

पाकिस्तानी संसद की एक समिति अमरीका और पाकिस्तान के मौजूदा संबंधों पर विचार विमर्श कर रही है.

ग़ौरतलब है कि हाल के दिनों में अमरीका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में काफ़ी तनाव आ चुके हैं.

उम्मीद है कि ये संसदीय समिति अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट संसद को पेश करेगी.

हिना रब्बानी खार ने कहा कि पाकिस्तान ईरान से कुछ प्रमुख मुद्दों पर बातचीत कर रहा है, जैसे गैस पाइपलाइन परियोजना, बिजली प्रसारण परियोजना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी वगैरह.

उनका कहना था, ''ये सारी परियोजनाएं पाकिस्तान के राष्ट्रीय हित में हैं और किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद वे सभी जारी रहेंगीं और पूरी की जाएंगी.''

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा था, ''ईरान गैस पाइपलाइन के कारण पाकिस्तान पर अमरीकी प्रतिबंध लगाया जा सकता है जिससे पहले से ही ख़राब हालत में चल रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर और भी बुरा असर पड़ेगा.''

अमरीकी संसद में बहस के दौरान हिलेरी क्लिंटन ने आगे कहा, ''जब अमरीका इस मामले में ईरान पर दबाव बना रहा है तो ये बात बिल्कुल समझ से परे है कि पाकिस्तान पाइपलाइन के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है.''

क्लिंटन ने पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतों को तो स्वीकार किया लेकिन कहा कि अमरीका कहता रहा है कि पाकिस्तान को तुर्केमिनिस्तान के रास्ते एक दूसरे गैस पाइपलाइन को बिछाना चाहिए.

लेकिन अमरीका के इस सुझाव का जवाब देते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, ''ईरान गैस पाइपलाइन परियोजना पाकिस्तान के राष्ट्रीय हित में सबसे बड़ी प्राथमिकता है और हमारे सभी मित्र देशों को पाकिस्तान की ऊर्जा संकट को समझना चाहिए.''

भारत शामिल नहीं

पाकिस्तान और ईरान ने गैस पाइपलाइन के निर्माण को लेकर मार्च 2010 में तुर्की में ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

7.6 अरब डॉलर की ये परियोजना पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

समझौते के तहत, ईरान प्रति दिन 750 क्यूबिक मिटर फ़ीट गैस पाकिस्तान को देगा. ये लाइन 2015 से चालू हो जाएगी.

पाइपलाइन का जो हिस्सा जिस देश में आएगा, उसी देश पर पाइपलाइन बनाने का ज़िम्मा होगा.

शुरूआत में भारत ईरान-पाकिस्तान के साथ मिलकर गैस पाइपलाइन योजना से जुड़ा रहा था. इस गैस पाइपलाइन को शुरू में 2.2 अरब क्यूबिक फ़ीट गैस भारत और पाकिस्तान को पहुँचाना था (दोनों देशों को आधी-आधी गैस).

शुरुआती योजना के अनुसार ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन का लगभग एक हज़ार किलोमीटर का हिस्सा पाकिस्तान से होकर भारत आना था और इसके लिए भारत को उसे ट्रांज़िट शुल्क देना पड़ता.

लेकिन कई मतभेदों कारण भारत 2009 में बातचीत से अलग हो गया था.

शांति पाइपलाइन नाम से मशहूर इस परियोजना के बारे में 90 के दशक में बात उठी थी. संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान के साथ अविश्वास के माहौल के कारण भारत इस योजना का हिस्सा बनने को लेकर आशंकित रहा था.

लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि भारत के 2008 में अमरीका के साथ परमाणु समझौता करने के बाद अमरीका ने भारत पर दबाव डाला था कि वो इस परियोजना से अलग हो जाए.

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