क्या पत्नी की बेवफाई ने ली ओसामा की जान?

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Image caption एबटाबाद के इसी घर में ओसामा बिन लादेन कई वर्षों से रह रहे थे. अब इसे तोड दिया गया है.

क्या अल-कायदा के पू्र्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत उनकी एक पत्नी की बेवफाई के कारण हुई? ज़ाहिर है ये सवाल ऐसा है जिसका जवाब ढूंढना इतना आसान नहीं.

लेकिन ये सवाल खड़ा हुआ है यही सबसे चौंकाने वाली बात है.

दरअसल इस सारे मामले की शुरूआत हुई पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ब्रिगेडियर शौकत कादिर के ज़रिए तैयार की गई एक रिपोर्ट से.

ब्रिगेडियर शौकत कादिर पिछले आठ महीनों से इस बात की जांच कर रहें हैं कि आखिर अमरीका को पाकिस्तान के एबटाबाद में रह रहे ओसामा बिन लादेन के ठिकाने के बारे में कैसे पता चला.

ब्रिगेडियर कादिर की रिपोर्ट से पता चलता है कि उनको शक है कि ओसामा की सबसे बड़ी पत्नी हुर्रिया ने ओसामा बिन लादेन को धोखा दिया था.

बीबीसी के जेम्स मेनेनडेज ने ब्रिगेडियर कादिर से बातचीत की और पूछा कि आखिर उन्हें क्यों इस बात का शक है कि हुर्रिया ही ओसामा की मौत की जिम्मेदार हो सकती हैं.

इसके जवाब में ब्रिगेडियर कादिर ने कहा कि हुर्रिया कहीं और रह रहीं थी और वो ओसामा के साथ रहने की जिद कर रहीं थी. इससे पहले ओसामा अपनी दो पत्नियों के साथ एबटाबाद के उस मकान में पिछले कई वर्षों से रह रहे थे.

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार आखिरकार फरवरी या मार्च 2011 में वो ओसामा के साथ रहने के लिए एबटाबाद चली आईं.

ब्रिगेडियर कादिर का कहना है कि उनके एबटाबाद आने के साथ ही अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एजेंट डॉक्टर शकील आफरीदी ने भी अपना काम शुरू कर दिया.

डॉक्टर शकील आफरीदी ने एबटाबाद के उस घर में रह रहे लोगों के ब्लड सैंपल लेना शुरू कर दिया था.

'बीवियों में जलन'

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार हुर्रिया को ओसामा की सबसे छोटी बीवी अमल अल सदा से काफी जलन होती थी.

लेकिन ये पूछे जाने पर कि क्या इसी जलन के कारण हुर्रिया ने ओसामा को धोखा दिया, इसके जवाब में ब्रिगेडियर कादिर का कहना है कि मामला सिर्फ़ जलन का नहीं है.

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार अमरीका ने ओसामा की खबर देने वाले के लिए जो 250 करोड़ डॉलर की इनामी राशी की घोषणा की थी, वो भी एक वजह हो सकती है.

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार अगर ओसामा के ठिकाने के बारे में उनके करीबी लोगों ने अमरीका को जानकारी दी तो ओसामा की खबर देने वाले को जो पैसे मिलते उसमे हुर्रिया का भी हिस्सा रहा होगा.

ब्रिगेडियर शौकत कादिर के अनुसार ये महज संयोग नहीं हो सकता कि हुर्रिया के आते के साथ ही इस सारे अभियान की शुरूआत हुई और कुछ ही दिन बाद ओसामा बिन लादेन मारे गए.

गौरतलब है कि दो मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमरीकी नौसेना के एक विशेष दस्ते के जरिए किए गए एक सैन्य अभियान में ओसामा बिन लादेन मारे गए थे.

इसके बाद ही दुनिया को पता चल पाया था कि ओसामा बिन लादेन कई वर्षों से पाकिस्तान के एबटाबाद में एक तीन मंजिला इमारत में अपनी तीन पत्नियों और दर्जनों बच्चों के साथ रह रहे थे.

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