'पीपुल्स पार्टी को हराना चाहती थी पाक सेना'

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Image caption अदालत ने करीब दस सालों के बाद इस मुक़दमे की सुनवाई शुरु की है और अभियुक्तों को बयान पेश करने का आदेश दिया है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि 1990 के आम चुनाव से पहले सैन्य नेतृत्व और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के दबाव पर पीपुल्स पार्टी को पराजित करने के लिए राजनेताओं को करीब 35 करोड़ रुपए बाँटे गए थे.

अदालत में यह जानकारी सेवानिवृत्त एयर मार्शल असगर खान की उस याचिका की सुनवाई में सामने आई, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी राजनीति, चुनावों और सरकारों के गठन में सेना और खुफिया ऐजेंसी आईएसआई की संदिग्ध भूमिका को चुनौती थी.

उन्होंने 16 जून 1996 में व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार का मामलों के नोटिस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट पत्र लिखा था और अदालत ने 28 अक्तूबर 1996 में उस पत्र को संवैधानिक याचिका में बदल दिया था.

अदालत ने इस मुकदमे की करीब तीन साल तक लगातार सुनवाई की थी लेकिन अब मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इसी साल 29 फरवरी को 10 साल बाद फिर से सुनवाई शुरू की.

'सेना ने दबाव डाला था'

अदालत ने उस समय के सेनाध्यक्ष जनरल असलम बेग, आईएसआई के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी, मुकदमे एक अहम व्यक्ति महरान बैंक के पूर्व अध्यक्ष यूनस हबीब को अपना बयान पेश करने का आदेश दिया था.

यूनस हबीब इन दिनों बीमार चल रहे हैं और वे गुरुवार को व्हील चेयर पर बैठ कर अदालत में पेश हुए, इस मामले का हिस्सा बनने पर माफी माँगी और अपना लिखित बयान पेश किया.

उन्होंने अपने बयान में कहा कि उस वक्त पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल असलम बेग और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का बदाव था और उनके पास कोई ओर विकल्प नहीं था.

उन्होंने अदालत को बताया कि जनरल असलम बेग ने उन्हें उस समय के राष्ट्रपति गुलाम इसहाक खान से मिलवाया था. उनके मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति इसहाक खान, जनरल असलम बेग, आईएसआई के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी और वरिष्ठ अधिकारी रोएदाद खान ने उन्हें राजनेताओं में रकम बाँटने के लिए इस्तेमाल किया था.

अदालत के आदेश पर अपना बयान पढ़ते हुए यूनस हबीब ने कहा कि ‘असलम बेग ने 19 मार्च 1990 को फोन किया और कहा कि राष्ट्रपति साहब आपसे मिलना चाहते हैं.’

अपने बयान में उन्होंने लिखा है कि जब वे राष्ट्रपति इसहाक खान से मुलाकात की तो उन्होंने 35 करोड़ रुपए की तुरंत व्यवस्था करने को कहा और उनके इनकार करने पर संघीय जाँच एजेंसी ने उन्हें कराची एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया.

'नवाज बना था प्रधानमंत्री'

यूनस हबीब ने अदालत को बताया कि बाद में उन्होंने 34 करोड़ 80 लाख रुपय का इंतजाम कर लिया, जिसमें 14 करोड़ विभिन्न राजनेताओं जबकि 15 करोड़ सिंध प्रांत के उस समय के मुख्यमंत्री जाम सादिक को दिए.

Image caption असग़र ख़ान ने 16 जून 1996 में व्यापक स्तर पर हुए भ्रष्टाचार का मामलों के नोटिस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट पत्र लिखा था.

उससे पहले आईएसआई के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी ने अदालत में अपना लिखित बयान पेश किया था और उनको नेताओं के नामों की जानकारी दी थी, जिनको रकम दी गई थी.

बयान के मुताबिक रकम लेने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, आबिदा हुसैन, मीर अफजल खान और ग़ुलाम मुस्तफा जतोई सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे जबकि जमाते इस्लामी, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट और धार्मिक और राजनीतिक दलों से भारी रकम भी मिली थी.

गौरतलब है कि 1990 के आम चनावों के बाद बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी हार गई थी और इस्लामी जम्हूरी इत्तिहाद जीत गया था और नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बने थे.

पाकिस्तान में राजनीतिक सरकारों का गठन करने और उनको खत्म करने में सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की अहम भूमिका रही है.

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