हाफिज का ठिकाना पता है, इनाम ठोस सबूत के लिए: अमरीका

हाफिज सईद इमेज कॉपीरइट AP
Image caption भारत हाफिज सईद पर मुंबई हमलों का 'मास्टरमाइंड' होने का आरोप लगाता है

अमरीका ने कहा है कि उसने हाफिज सईद पर 50 करोड़ रुपए के इनाम की घोषणा ठोस सबूत और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए की है, न कि उसका ठिकाना जानने के लिए.

जहाँ भारत प्रतिबंधित संगठन लश्करे तैयबा के हाफिज सईद को मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराता है वहीं अमरीका ने कहा है 'हाफिज सईद जैसे लोग इस क्षेत्र के लिए खतरा हैं क्योंकि मुंबई हमले ही नहीं उन्होंने क्षेत्र में कई अन्य हमलों को अंजाम दिया है.'

बुधवार को अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, "हमें पता है उन्होंने (हाफिज सईद ने) कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. स्पष्ट करना चाहता हूँ, हम उनका ठिकाना नहीं खोज रहे, वो तो पाकिस्तान में हर पत्रकार जानता है. हम ऐसी जानकारी और सबूत खोज रहे हैं जिससे अदालत में उनका दोष साबित किया जा सके."

टोनर ने कहा कि ये इनाम की घोषणा किसी देश पर दबाव बनाने के लिए नहीं की गई है. उन्होंने इस बात की भी खंडन किया कि पाकिस्तान अमरीका के ठोस सबूत पेश करने की मांग की है.

जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद ने बुधवार को पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था, "अमरीका ने किस कानून के तहत मेरी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया है क्योंकि न तो अमरीका की कोई अदालत में मेरे खिलाफ आदेश दिया है और न ही वहाँ मेरे खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज है."

'अमरीकी या किसी विदेशी अदालत में'

अमरीका के हाफिज सईद पर इनाम की घोषणा करने के बाद अमरीका की काफी आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि हाफिज सईद के ठिकाने और घूमने फिरने की जानकारी को सार्वजनिक है तो अमरीका को इनाम की घोषणा करने की जरूरत क्यों पड़ी.

अमरीका का कहना है कि उसके पास हाफिज सईद की गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी है लेकिन वो जरूरी नहीं कि अदालत में इस्तेमाल की जा सके.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, "हम ऐसे सबूत खोज रहे हैं जो अदालत में उन्हें (हाफिज सईद) को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए जा सकें....जरूरी नहीं कि पाकिस्तानी अदालत में ही...हम ऐसे सबूत खोज रहे हैं जिनका इस्तेमाल अमरीकी या फिर किसी विदेशी अदालत किया जा सके."

उनका कहना था कि इस इनाम का मकसद ध्यान को दोबारा हाफिज सईद पर केंद्रित करना है और पाकिस्तानी सरकार की मदद करना है ताकि उसे इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जानकारी और सबूत मिल सकें.

संबंधित समाचार