गिलानी: अवमानना मामले में कब क्या हुआ

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Image caption अदालत में प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी.

यूसुफ रजा गिलानी पाकिस्तान के सियासी इतिहास में पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके खिलाफ़ अदालत की अवमानना का मुकदमा अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचा है. उन पर 13 फरवरी 2012 को इस मुकदमें में चार्जशीट दायर की गई थी.

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और नवाज शरीफ के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी लेकिन उनके खिलाफ़ मुकदमा नहीं चलाया गया था.

गिलानी के खिलाफ अदालत की अवमानना मुकदमें की समस सारणी इस प्रकार हैं.

जनवरी 2012

16 जनवरी: जस्टिस नासिरूल मुल्क की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने एनआरओ मामले में गिलानी को कारण बताओ नोटिस जारी कर उन्हें 19 जनवरी को खुद अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.

19 जनवरी: गिलानी अपने वकील एतजाज अहसन के साथ निजी गाड़ी को खुद चलाकर अदालत पहुंचे. अदालत ने उन्हें आगे निजी हाजरी से राहत देदी और अगली कार्वाई के लिए दो फरवरी की तारीख तय कर दी.

फरवरी 2012

02 फरवरी: अदालत ने गिलानी के वकील की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने के निर्देश दिए और गिलानी को 13 फरवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए.

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Image caption अदालत ने गिलानी से राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे को दोबारा शुरू करने के लिए स्विस अधिकारियों को खत लिखने को कहा था.

08 फरवरी: गिलानी ने आरोप तय किए जाने के खिलाफ अपील दायर की. अदालत ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय खंडपीठ का गठन किया और नौ फरवरी से गिलानी की अपील पर सुनवाई करने की घोषणा की.

09 फरवरी: अदालत ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री गिलानी स्विस अधिकारियों को मुकदमा दोबारा शुरू करने के लिए खत लिख दें तों उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा वापस कर लिया जाएगा. अदालत ने अगले दिन सुनवाई करने के आदेश दे दिए.

10 फरवरी: अदालत ने गिलानी के वकील एतजाज अहसन की दलील खारिज कर दी.

13 फरवरी: अदालत में मुख्य न्यायाधीश ने गिलानी के खिलाफ आरोप को खुद पढ़ कर सुनाया और अगली कार्रवाई के लिए 28 फरवरी की तारीख तय की.

मार्च 2012

08 मार्च: अदालत ने गिलानी को 19 मार्च तक लिखित बयान दाखिल कराने का आदेश दिया.

19 मार्च: प्रधानमंत्री की तरफ से दाखिल लिखित बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले को दोबारा शुरू करने के लिए स्विस अधिकारियों को खत नहीं लिखा जाएगा. इस बयान में खंडपीठ की निष्पक्षता पर भी संदेह व्यक्त किया गया और कहा गया कि अदालत ने फैसला सुनाने से पहले ही अपना मन बना लिया है.

21 मार्च: गिलानी के वकील एतजाज अहसन ने सुनवाई के दौरान खंडपीठ पर अविश्वास जताते हुए कहा कि मुकदमा गलत दिशा में जा रहा है.

अप्रैल 2012

12 अप्रैल: खंडपीठ के अध्यक्ष जस्टिस नासिरूल मुल्क ने कहा कि राष्ट्रपति जरदारी का कार्यकाल समाप्त होने तक खत लिखने का मामला अगर टाल दिया गया तो फिर ये अदालती आदेश की अवमानना होगी.

24 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी के खिलाफ अदालत की अवमानना मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा 26 अप्रैल को फैसला सुनाने की घोषणा की. साथ ही गिलानी से 26 अप्रैल को अदालत में हाजिर होने के लिए कहा.

26 अप्रैल: गिलानी अदालत के सामने तीसरी बार पेश हुए. अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया और अदालत बर्खास्त होने तक की सजा सुनाई.

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