अमरीका को ओसामा का सुराग 'आईएसआई' ने दिया

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Image caption अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन, मई 2011 में एक गुप्त अमरीकी अभियान में पाकिस्तान के ऐबॉटाबाद शहर में मारा गया.

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक बेनाम वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के ठिकाने का पता लगाने में अमरीकी खुफिया अधिकारियों की मदद करने के लिए संस्था को श्रेय मिलना चाहिए.

अमरीकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक पाकिस्तान की इंटर-सर्विसिस इंटेलिजेंस निदेशालय (आईएसआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस्लामाबाद में शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा कि "इस बारे में शुरुआती सुराग और जानकारी असल में हमारी तरफ से आई थी."

आईएसआई पर ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह देने में मिली भगत के आरोप लगते रहे हैं.

अल-कायदा के संस्थापक, ओसामा बिन लादेन, दो मई 2011 को एक गुप्त अमरीकी अभियान में पाकिस्तान के ऐबॉटाबाद शहर में मारे गए थे.

अमरीकी अभियान के बाद पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि उसे नहीं मालूम था कि वहां छह साल से ओसामा बिन लादेन छुपा हुआ है. आईएसआई अब भी उसी बात पर कायम है.

लेकिन हाल ही में बिन लादेन की एक विधवा ने दावा किया था कि अल-कायदा के नेता ने पाकिस्तान में नौ साल बिताए जिस दौरान वो अलग-अलग ठिकानों पर रहे और चार बच्चे भी वहीं पैदा हुए. इन दावों से एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान की ताकतवर खुफिया एजेंसी में किसी को ओसामा के बारे में जानकारी थी.

'विश्वास की कमी और धोखा'

वॉशिंगटन पोस्ट की खबर में दो आईएसआई अधिकारियों का हवाला दिया गया है.

अखबार में आईएसआई के एक बेनाम वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "दुनिया के किसी भी कोने में अल-कायदा पर कोई भी हमला हमारी मदद से हुआ है."

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Image caption आईएसआई का दावा है कि उसने ही सीआईए को ऐबॉटाबाद में बिन लादेन की मौजूदगी के शुरुआती सुराग और जानकारी दी थी.

रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा है कि आईएसआई ने ही सीआईए को वो मोबाइल फोन नंबर मुहैया कराया था जिससे अमरीकी एजेंसी आखिरकार एक अल-कायदा 'कोरियर' तक पहुंच पाई.

खबर में आगे लिखा है कि आईएसआई ने तब कहा था कि उसे नहीं पता था कि फोन नंबर अबु अहमद अल-कुवैती नाम का इस्तेमाल कर रहे व्यक्ति का है लेकिन ये बात सीआईइए को पता थी. फिर भी अमरीकी खुफिया एजेंसी ने ये जानकारी पाकिस्तान को नहीं दी.

अधिकारी के हवाले से बताया गया है, "सीआईए जानता था नंबर किसका है लेकिन इसके बाद उनका हमसे सहयोग खत्म हो गया."

दूसरे आईएसआई अधिकारी ने कहा, "ये विश्वास की अत्याधिक कमी और धोखे की कहानी है.”

लेकिन शुक्रवार को आए आईएसआई के इस दावे को एक अमरीकी अधिकारी ने नकार दिया है.

द वॉशिंगटन पोस्ट ने इस अमरीकी अधिकारी के हवाले से कहा है, “सच तो ये है कि उस फोन नंबर की जानकारी हमें उनसे (आईएसआई) नहीं मिली.”

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