भागता फिरता था ओसामा बिन लादेन का परिवार

 शनिवार, 5 मई, 2012 को 19:21 IST तक के समाचार
ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन का ठिकाना

पिछले इसी घर में अमरीकी कार्रवाई के दौरान ओसामा बिन लादेन मारा गया था.

गुरुवार को सामने आई ओसामा बिन लादेन की चिट्ठियां मृत अल-क़ायदा प्रमुख के दिमाग के काम करने के तरीके पर रोशनी डालती हैं लेकिन उनमें बिन लादेन के परिवारिक जीवन के बारे बहुत कम जानकारी है.

लेकिन बीबीसी को अपने सूत्रों से पता चला है कि पाकिस्तान में 10 वर्ष बिताने के दौरान बिन लादेन और उनका परिवार देश भर घूमा. साथ ही इस परिवार को चिकित्सीय सहायता भी उपलब्ध थी. और ये लोग बाहरी दुनिया के साथ भी लगातार संपर्क में थे.

साल भर पहले ऐबटाबाद के जिस घर में दुनिया का मोस्ट वांटेड व्यक्ति मारा गया था, वहां से अमरीकी कमांडो दस्ते को करीब 25 लोग मिले थे.

नौ महीने तक पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों की हिरासत में रहने के बाद इनमें से कुछ पर गैर-कानूनी रूप से पाकिस्तान में रहने का मुकदमा चलाया गया था.

उसके बाद पिछले हफ़्ते बिन लादेन की तीन पत्नियों समेत उनके परिवार के सभी 14 सदस्यों को सऊदी अरब भेज दिया गया. लेकिन ऐबटाबाद के इस घर में और लोग भी रह रहे थे.

और कौन था ऐबटाबाद में?

वजिरीस्तान की हवेली

  • ऐबटाबाद का घर बिन लादेन के लिए साल 2005 में बनाया गया था
  • इससे पहले बिन लादेन परिवार कई पाकिस्तानी शहरों में भागता फिर रहा था
  • इस दौरान बिन लादेन की सबसे छोटी पत्नी ने चार बच्चों को जन्म दिया
  • ऐबटाबाद वाले घर को स्थानीय लोग वजिरीस्तान की हवेली कहते थे
  • बिन लादेन सबसे ऊपरी मंजिल पर रहते थे और उन्हें स्थानीय लोगों ने कभी नहीं देखा

अमरीकी कमांडो कार्रवाई में बिन लादेन के पुत्र खालिद, उनके पाकिस्तानी सहायक, इबरार उर्फ़ अरशद ख़ान उर्फ़ अबू अहमद अल-कुवैती, ख़ान की पत्नी और उनके भाई मारे गए थे.

लेकिन उनके परिवार के कुछ सदस्य बच गए थे और उनका मौजूदा पता एक राज़ है.

क्योंकि इनमें से किसी भी व्यक्ति ने कभी बिन लादेन के बारे में कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, इसलिए उनके पाकिस्तान प्रवास के विषय में कम ही जानकारी है.

हमें सिर्फ़ इतना पता है कि बिन लादेन ने ऐबटाबाद के घर में छह साल बिताए थे. इस घर का दौरा करने वाले एकमात्र पत्रकार, सीएनएन के पीटर बर्गन इसे एक मैली-कुचैली कैंप साइट बताते हैं.

बिन लादेन बच्चों और संभवत झगड़ालू पत्नियों से घिरे रहते थे.

उनकी सबसे छोटी पत्नी यमन से आई अमाल अब्दाल फ़ताह ने बिन लादेन के जीवन के बारे में पाकिस्तानी जांचकर्ताओं को काफ़ी जानकारी दी थी.

अमाल फ़ताह ने जो जानकारी दी थी वो हाल में मीडिया के ज़रिए बाहर आई है.

9/11 के बाद बंटा परिवार

बिन लादेन का परिवार पाकिस्तान छोड़ते हुए

बिन लादेन के परिवार को पाकिस्तान से सऊदी अरब भेज दिया गया है.

बिन लादेन की पत्नी ने पाकिस्तानी जांचकर्ताओं को बताया कि उनकी शादी साल 2000 में कंधार में हुई थी. अमरीका पर हुए 9/11 के हमलों तक वे बिन लादेन की अन्य दो पत्नियों के साथ वहीं रही थीं.

इसके बाद परिवार बंट गया और अमाल कराची चली गई, जहां वे अपनी बच्ची के साथ साल 2002 के मध्य तक रहीं. उसके बाद वे बिन लादेन के पास चली गई.

बिन लादेन की मौत की जांच करने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर शौकत कादिर लिखते हैं कि साल 2002 में बिन लादेन और अमाल ने पेशावर के दक्षिण में स्थित एक गांव में कुछ समय बिताया था.

अमाल ने जांचकर्ताओं को बताया था कि वहां बिन लादेन का इलाज किया गया था. वहां बिन लादेन से मिलने खालिद शेख मोहम्मद भी आया था. अब खालिद शेख मोहम्मद अमरीका पर हुए 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड होने के आरोप में अभियोग चलाया जा रहा है.

साल 2003 या साल 2004 के शुरू में बिन लादेन अमाल और उनके बच्चे स्वात के पास शांगला चले गए थे. उसके बाद 2004 की गर्मियों में ये हरीपुर में रहे और आख़िर में 2005 के अंत में या 2006 के शुरू में ऐबटाबाद में आ गए.

'पत्नियों का झगड़ा'

अमाल अब्देल फताह

अमाल बिन लादेन की सबसे छोटी पत्नी थी.

अमाल ने जांचकर्ताओं को बताया कि 2003 से 2008 के बीच उसने चार बच्चों को जन्म दिया और ये सभी बच्चे सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए.

बिन लादेन की बाक़ी दो पत्नियों के बारे में साल 2001 के बाद से अधिक जानकारी नहीं है.

ब्रिगेडियर शौकत कादिर के सऊदी अरब की नागरिक शरीजा सीहम और उनके तीन बच्चे साल 2004 में बिन लादेन और अमाल के पास हरिपुर चले गए थे और वे बिन लादेन की मौत तक उनके साथ ही रहे.

शरीजा 24 साल के खालिद की मां थीं और वो बिन लादेन के ठिकाने पर हुए अमरीकी हमले में मारी गई थीं.

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार शरीजा एक अध्यापक थी और वो बच्चों की पढ़ाने की गरज से हमेशा परिवार के साथ रही.

बिन लादेन की सबसे बड़ी पत्नी खैरय्या सहाबा 9/11 हमलों के बाद शायद ईरान चली गई थीं और उन्हें वहां साल 2003 या 2004 में हिरासत में ले लिया गया था.

खैरय्या को सितंबर 2010 में ईरानी कूटनयिक हशमतुल्ला अथरजादेह की रिहाई के बदले में छोड़ दिया गया था. अथरजादेह को चरमपंथियों ने साल 2008 में पेशावर से अग़वा कर लिया था.

क्या बिन लादेन की पत्नी से हुई चूक?

अब बिन लादेन के ऐबटाबाद स्थित ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया है.

उनके बेटे तो अज्ञात जगहों पर चले गए लेकिन खरैय्या वाजिरीस्तान में बिन लादेन के सहयोगी अत्तिया अब्दुर रहमान के पास चली गईं. उसके बाद वे साल 2011 के शुरू में बिन लादेन के ऐबटाबाद ठिकाने पर पहुंचीं.

ब्रिगेडियर कादिर के अनुसार खरैय्या बिन लादेन की सबसे छोटी पत्नी अमाल से बहुत चिढ़ती थीं.

ब्रिगेडियर लिखते हैं, “इस समय बिन लादेन सिर्फ़ अमाल के साथ ही सोते थे. लेकिन इस सूरत में वे अपनी जीवन को जोखिम में डालकर अपने पति के पास क्यों गईं? ”

ब्रिगेडियर को शक है कि खरैय्या अमरीकियों को बिन लादेन की ठिकाने तक लाई थी.

मई 2010 में बीबीसी को पता चला था कि बिन लादेन वजीरीस्तान गए थे. ये वो समय था जब वजीरीस्तान पर अमरीकी ड्रोन हमले हो रहे थे और पाकिस्तान सेना चरमपंथियों के ख़िलाफ कई ऑपरेशनों को अंजाम दे रही थी.

बिन लादेन वजीरीस्तान में अपने कमांडरों से मिलने गए थे ताकि वे हालात का खुद जायजा ले सकें. उसके बाद उन्होंने अपने दौरे के बारे में अतिया अब्दुर रहमान को लंबा खत लिखा था.

अक्तूबर 2010 में लिखा ये खत अमरीका की ओर से जारी किए गए दस्तावेंजों का हिस्सा है.

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