पाकिस्तान के सिख टीवी होस्ट तरनजीत

तरनजीत सिंह
Image caption तरनजीत सिंह पाकिस्तान मशहूर टीवी होस्ट हैं और वह युवा उनको काफी पंसद करते हैं.

पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को हमेशा से ही समस्याओं का सामना रहा है और वह समस्याएँ कम नहीं हुई हैं, लेकिन कुछ ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इन सब दिक्कतों के बावजूद समाज में अपना स्थान बनाए रखा है. उनके योगदान को पूरे देश में कदर की निगाह से देखा जा रहा है.

बीबीसी हिंदी ने कुछ ऐसी ही खास शख्सियतों से बातचीत की है. इस शृंखला की छठवीं और अंतिम कड़ी में पाकिस्तान के जाने-माने टीवी ऐंकर तरनजीत सिंह से बातचीत.

पाकिस्तान में अकसर शाम को टीवी पर पगड़ी पहने एक युवा सिख नज़र आता है और पहले लगता है कि आप कोई भारतीय टीवी चैनल देख रहे हैं लेकिन जब ध्यान से देखते हैं तो पता चलता है कि वह तो पाकिस्तान का सरकारी टीवी चैनल ‘पीटीवी’ है.

तरनजीत सिंह पीटीवी पर युवाओं के कार्यक्रम को होस्ट करते हैं और वह कार्यक्रम पाकिस्तान में खास तौर पर युवाओं में बहुत लोकप्रिय है.

संस्कृति को किया उजागर

‘वॉइस ऑफ यूथ’ के नाम से इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी युवाओं के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है और उन्हें इस कार्यक्रम के माध्यम से जानकारी भी बहुत मिलती है. वह पिछले तीन सालों से इस कार्यक्रम को होस्ट कर रहे हैं.

उन्होंने अपने कार्यक्रमों में पाकिस्तानी संस्कृति को भी उजागर किया और इस पर प्रोग्रामों की एक सिरीज़ भी कर चुके हैं, जिसको पाकिस्तान में काफी पंसद किया गया था.

तरनजीत सिंह ने प्राथमिक शिक्षा पेशावर से हासिल की और उसके बाद लाहौर से अकाउंटेंसी में डिग्री ली. उन्होंने पढ़ाई तो बैंकिंग की लेकिन बैंकर बनने के बजाए मीडिया में कदम रखा.

मीडिया में आने के अपने शौक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहे थे तो उस समय मीडिया काफी आगे बढ़ रहा था और उन्होंने अपने समुदाय की आवाज़ को मीडिया तक पहुँचाने के लिए उसमें कदन रखा.

वह कहते हैं, “पाकिस्तानी मीडिया में आपको बोलने की आज़ादी दी गई तो उसकी चाहत ने मुझे अकाउंटेंसी से हटा कर मीडिया में पहुँचा दिया.”

तरनजीत सिंह अल्पसंख्यकों में से पहले व्यक्ति हैं जो मीडिया की एक शख्सियत बन गए हैं. वे कहते हैं कि बतौर अल्पसंख्यक समुदाय के एक व्यक्ति के उन्हें इस स्थान तक पहुँचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

छोटा समुदाय - बड़ी दिक्कतें

वह कहते हैं, “विडंबना यह है कि एक छोटा सा समुदाय उसको इतनी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बड़ी अजीब स्थिति है कि अगर कोई चीज़ किसी हिंदू या सिख को दे दी जाए तो यह समझा जाता है कि यह दिल्ली पहुँचा देगा. लोग आपको स्वीकार नहीं करते हैं.”

तरनजीत के मुताबिक जब उन्होंने मीडिया में काम करना शुरु किया तो लोग उन्हें समझते थे कि वह किसी भारतीय टीवी चैनल में काम कर रहे हैं, इस लिए कोई बात भी नहीं करता था.

उन्होंने कहा, “कई बार काम करते हुए मैंने अपना पहचान पत्र और पासपोर्ट दिखाया है कि मैं एक पाकिस्तानी हूँ और यह सब जानते हुए भी लोग पूछते हैं कि आपका भारतीय पासपोर्ट कहाँ हैं. यह सुन कर बहुत दुख होता है.”

वह कहते हैं कि तीन चार सालों की कड़ी महनत के बाद अब लोग उनसे अच्छा बर्ताव करते हैं और उनसे बातचीत भी कर लेते हैं क्योंकि उन्होंने गरीब लोगों के मुद्दों को सरकार तक पहुँचाया.

तरनजीत के मुताबिक अल्पसंख्यकों को सही तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया है और अगर पाकिस्तानी सरकार और उसे संबधित संस्थान अल्पसंख्यकों को अच्छी तरह से इस्तेमाल करें तो वह दुनिया में देश की बहतर छवि पेश कर सकते हैं.

अल्पसंख्यक युवाओं पर बात करते हुए वह कहते हैं कि उन्हें समाज में अपना स्थान बनाने के लिए जोखिम लेना होगा और अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो हमेशा हाशिए पर भी रहेंगे.

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