फिल्म दिखाई तो 'फिर फेंका जा सकता है' तेजाब......

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पाकिस्तान में चेहरे पर तेजाब फेंके जाने के दुष्परिणाम भुगत रही महिलाओं ने आगाह किया है कि अगर इस मुद्दे पर बनी ऑस्कर विजेता पाकिस्तानी फिल्म सेविंग फेस वहाँ दिखाई गई तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएँगी.

पाकिस्तानी डॉक्यूमेंट्री सेविंग फेस को इस साल ऑस्कर पुरस्कार मिला था. लेकिन डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली शरमीन ओबेद चिनॉय और इस फिल्म में दर्शाई गई महिलाओं के बीच तकरार चल रही है.

पीड़ितों का कहना है कि अगर ये फिल्म पाकिस्तान में दिखाई गई तो उन्हें समाज के पलटवार का सामना करना पड़ सकता है और हो सकता है कि उन पर और हमले हों.

मुख्य विवाद इस बात को लेकर है कि क्या इस 40 मिनट के वृत्तचित्र में दर्शाई गई महिलाओं ने फिल्म को पाकिस्तान में प्रदर्शित करने की अनुमति दी थी या नहीं.

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इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि कैसे पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी सर्जन मोहम्मद जावेद पाकिस्तान में घूम घूम पर ऐसी महिलाओं की सर्जरी करते हैं जिन पर तेजाब फेंका गया है.

फिल्म में पीड़ित महिलाएँ अपनी कहानी खुद बयां करती हैं. इस फिल्म की काफी सराहना हुई है लेकिन कुछ पीड़ित नाराज हैं.

तेजाब फेंके जाने के कारण अपनी एक आँख गंवा चुकी 22 साल की नालिया फरहत कहती हैं, “हमने बिल्कुल नहीं सोचा था कि फिल्म इतनी लोकप्रिय हो जाएगी और इसे ऑस्कर मिलेगा. हमने उन्हें कभी नहीं कहा था कि वे फिल्म को पाकिस्तान में दिखा सकते हैं. ये मेरे परिवार का अपमान है. वे इसे मुद्दा बनाएँगे. फिल्म प्रदर्शित होने के बाद तो हम पर खतरा और बढ़ सकता है. हमें डर है कि कहीं फिर ऐसा हादसा दोबारा न हो जाए. हम अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहते.”

इन महिलाओं के वकील नावेद मुजफ्फर खान ने बीबीसी को बताया कि एक सहमति पत्र तो था पर किसी ने भी पाकिस्तान में फिल्म स्क्रीन किए जाने पर सहमति नहीं दी थी.

उन्होंने बताया कि कानूनी नोटिस भेज दिए गए हैं. इन महिलाओं के वकीलों का कहना है कि अगर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई गई तो वे कोर्ट जाएँगे.

लेकिन शरमीन ओबेद चिनॉय का कहना है कि महिलाओं ने कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे कि पाकिस्तान समेत फिल्म कहीं भी दिखाई जा सकती है.

उन्होंने एएफपी को बताया कि पाकिस्तान में दिखाई जाने वाली डॉक्यूमेंट्री में रुखसाना नाम की महिला को वो खुद से ही नहीं दिखा रही हैं क्योंकि वो ऐसा नहीं चाहती थीं.

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