डॉक्टर को सजा देने पर पाकिस्तानी प्रेस विभाजित

अखबारों
Image caption पाकिस्तान में अधिकतर अंग्रेजी अखबारों ने इस सजा पर सवाल उठाए हैं जबकि उर्दू समाचार पत्रों ने डॉक्टर की जमकर आलोचना की.

पाकिस्तानी डॉक्टर शकील आफरीदी को सजा देने पर पाकिस्तान के मीडिया ने अलग अलग तरीके से प्रतिक्रिया की है.

पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मारने में सीआईए की मदद करने वाले डॉक्टर शकील आफरीदी को कैद की सजा सुनाई गई है.

इससे यह बहस छिड़ गई है कि क्या वो 'देशद्रोह' का काम था या फिर 'वे आंतकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध' थे.

इस सजा के बाद अमरीकी सीनेट की एक अहम समिति ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि में तीन करोड़ तीस लाख डॉलर की कटौती कर दी है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने भी डॉ शकील को 33 साल की कैद की सज़ा की निंदा की थी.

जबकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोआजम खान ने कहा कि अमरीका को पाकिस्तान के न्यायिक प्रणाली का सम्मान करना चाहिए.

पाकिस्तान में अधिकतर अंग्रेजी अखबारों ने इस सजा पर सवाल उठाए हैं जबकि उर्दू समाचार पत्रों ने डॉक्टर की जमकर आलोचना की.

'ईनाम के बजाए सजा'

डेली टाइम्स ने एक संपादकीय में कहा, ''सबसे वांछित आंतकवादी को दुनिया से छुटकारा दिलाने में मदद करने के लिए ईनाम देने के बजाए आफरीदी को 33 साल की सजा सुनाई गई है...आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदार होने के नाते लादेन को ढूंढना पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारी थी...''

उसने आगे लिखा, ''यह न केवल डरावना है बल्कि अनुचित भी है...आफरीदी ने दोनो देशों के हित का काम किया है. न्याय तभी मिलेगा अगर आफरीदी को रिहा किया जाता है.''

कराची के अख्बार डॉन ने लिखा है, ''अभियुक्त को वकील से वंचित रखा गया जबकि कुछ बजुर्ग लोगों ने उनकी किस्मत का फैसला कर दिया. उनकी सुनवाई स्थाई कोर्ट में क्यों नहीं की गई? या फिर उससे कुछ कड़वे सच सामने आते?''

फैसले की तारीफ

पाकिस्तान ऑबजर्वर ने इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा है, ''अदालत के इस अच्छे फैसले के मुताबिक डॉक्टर शकील एक विदेशी जासूसी एजेंसी के लिए काम करते थे जो पाकिस्तान के कानून के अनुसार देशद्रोह है...''

उसने आगे लिखा, ''इसलिए हमारे ख्याल से समय आ गया है कि हमारे प्रिय मित्र कुछ भी कहें, सरकार और देश को अपने सुरक्षा की चिंता का ध्यान रखना होगा और उन सब लोगों को सजा देनी होगी जो जन्मभूमि के हितों को नजरअंदाज कर अपना जमीर बेचते हैं.''

उर्दू मीडिया की बात करें तो कराची के अख्बार उनमत ने लिखा है, ''हिलेरी क्लिंटन ने डॉक्टर शकील आफरीदी की तुरंत रिहाई की मांग की है. अमरीका सोचता है कि पाकिस्तान की बेटी डॉक्टर अफिया सिद्दीक को उस अपराध के लिए सजा देना जो हुआ ही नहीं था जायज है लेकिन डॉक्टर आफरीदी को अपने देश के खिलाफ देशद्रोह करने के लिए 33 साल की सजा उसे पसंद नहीं. हमारा मानना है कि हमें ऐसे देश से दूर रहना चाहिए.''

रावलपिंडी के समाचार पत्र नवा-इ-वक्त ने लिखा है, ''अमरीका ने कहा है कि डॉक्टर आफरीदी की गतिविधियों को देशद्रोह समझना गंभीर गलती है...हम मानते हैं कि अमरीका को कोई हक नहीं है कि वो पाकिस्तान के फैसले को गंभीर गलती करार दे...अमरीका को पाकिस्तान के कानूनों का अपमान करने से दूर रहना चाहिए.''

संबंधित समाचार