क्या दोस्त बन पाएंगे अमरीका और पाकिस्तान

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Image caption अमरीका ने डॉक्टर शकील अफरीदी को रिहा करने की मांग की थी.

अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अमरीकियों की मदद करने के आरोप में पाकिस्तान ने डॉक्टर शकील अफरीदी को 33 साल की कैद की सजा सुनाई है.

पाकिस्तान की कबायली जिरगा के इस फैसले से नाराज़ अमरीकी सीनेट की एक समिति ने पाकिस्तान को दी जानेवाली सहायता राशि में तीन करोड़ तीस लाख डॉलर की कटौती कर दी है.

अमरीका डॉक्टर शकील अफरीदी की रिहाई की मांग कर रहा था.

इस मुद्दे ने पहले से ही पाकिस्तान-अमरीका के बीच तनावपूर्ण संबंधों को और तल्ख बना दिया है.

पाकिस्तान ने सीनेट के फैसले की निंदा करते हुए कहा है कि ये न्यायिक फैसला है और अमरीका को इसका सम्मान करना चाहिए.

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पाकिस्तान और अमरीका के बिगड़ते संबंधों के विश्लेषण के लिए बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी ने बीबीसी हिंदी सेवा के प्रमुख अमित बरुआ से बात की.

अमरीका और पाकिस्तान के बीच बिन लादेन की मौत के बाद से जो रिश्तों में खटास शुरू हुई थी वो लगातार बढ़ती जा रही है. इस बीच कई प्रकरण हुए हैं जैसे नैटो हमले में पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, उसके बाद अमरीका में पाकिस्तानी राजदूत हक्कानी का प्रकरण था और अब डॉक्टर अफरीदी का जो प्रकरण है उसे देखते हुए कभी मधुर माने जानेवाले अमरीका पाकिस्तान संबंध अब किधर जाते नजर आ रहे हैं.

पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों के लिए ये काफी मुश्किल दौर है. जो खींचा-तानी है वो अब सबको नजर आने लगी है. अमरीका का जिस तरह पाकिस्तान पर दबदबा था वो अब मुझे काफी कम होता नजर आ रहा है.

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ नेटो सेना की जो लड़ाई चल रही है उसमें अमरीका बार-बार ये कहता रहा है कि पाकिस्तान बेहद जरूरी है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान का सहयोग जरूरी है. लेकिन डॉक्टर अफरीदी को जेल की सजा सुनाए जाने के मुद्दे को अमरीका इतना तूल क्यों दे रहा है.

ऐसा लगता है कि ओसामा बिन लादेन के घर पर जो रेड हुई थी उसमें इस डॉक्टर की कोई भूमिका रही होगी. मेरा मानना है कि ये सब एक कड़ी है. ये कोई अलग घटना नहीं है. काफी समय से रिश्ते बिगड़ते आ रहे हैं और अब सीनेट की कमेटी ने जो ये फैसला लिया है. तो इसे देखते हुए ये साफ नजर आ रहा है कि अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों में फिलहाल सुधार की संभावना कम है. अमरीका में अभी राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं और जिस तरह से नेटो के शिकागो सम्मेलन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति को वहां बुलाया गया और फिर राष्ट्रपति ओबामा ने उनसे अलग से मुलाकात नहीं की. इससे लगता है कि अमरीका ने सार्वजनिक रूप से अपने असंतोष का इजहार किया है. जिस तरह से दोनों मुल्कों के बीच बयानबाज़ी चल रही है उससे मैं अनुमान लगा सकता हूं कि पीठ पीछे जो बातें हो रही हैं उनमें ज्यादा दम नहीं है फिलहाल.

सीनेट की जिस समिति ने 33 मिलियन डॉलर की सहायता राशि में कटौती का सुझाव दिया है उसके एक सदस्य हैं लिंडजी ग्रैहम. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान मदद तो अमरीका से ले रहा है लेकिन हक्कानी नेटवर्क के साथ भी संबंध बनाए रखे. अमरीकी रूख में ये जो अचानक बदलाव आया है, हमले तेज हो गए हैं, उसकी आप क्या वजह मानते हैं.

वजह है ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में पाया जाना और अमरीका को शायद इस बात की खबर है कि पाकिस्तान सरकार के कुछ लोग हक्कानी नेटवर्क की मदद करते हैं. इस मुद्दे को अमरीका ने बार-बार उठाया है. कुछ साल पहले काबुल में भारतीय दूतावास पर जब हमला हुआ था तो अमरीका ने भारत को इस बारे में कई अहम जानकारियां दी थीं. इसलिए मेरा मानना है कि ये सब घटनाएं एक कड़ी का ही हिस्सा हैं और दोनों देशों के रिश्तों में काफी सुधार की जरूरत है क्योंकि दोनों मुल्क एक दूसरे के काफी करीबी रहे हैं और दोस्तों के बीच कई बार मतभेद हो जाते हैं. लेकिन हाल के दिनों में जो मतभेद सामने आए हैं वो काफी पक्के होते नजर आ रहे हैं.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अभी भारत दौरे पर कहा था कि अलकायदा के नए प्रमुख अयमन अल जवाहिरी भी पाकिस्तान में ही कहीं हो सकते हैं. इन पूरी घटनाओं को अगर ध्यान में रखें तो भारत के लिए बिगड़ते अमरीका-पाकिस्तान संबंध कितनी चिंता का विषय हैं.

हिलेरी क्लिंटन ने जब ये बात कही थी तो उसकी पाकिस्तान से तुरंत प्रतिक्रिया भी आई और उनके विदेश मंत्री ने इस बात का खंडन किया. अगर ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की धरती पर पाए जा सकते हैं तो कुछ अन्य चरमपंथी नेता भी वहां हो सकते हैं जैसा कि अमरीका का मानना है. जहां तक भारत का सवाल है तो अफगानिस्तान से जो नेटो सेना को वापस बुलाने की कार्रवाई होगी उसमें भारत की चिंताएं भी जुड़ी हैं और भारत ने उन चिंताओं से अवगत भी कराया है. मुझे लगता है कि अमरीका और भारत के रिश्ते अभी अच्छे हैं और जब 2014 में नेटो सैनिकों की वापसी होगी तो भारत उस समय भारत की चिंताएं भी उभर कर सामने आएंगी.

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