खैबर पख्तूख्वाह में तीरंदाजी की संस्कृति

खैबर पख्तूख्वाहं
Image caption खैबर पख्तूख्वाह तालिबान का गढ़ माना जाता है लेकिन मोखा के खेल की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है.

कहा जाता है कि रॉबिन हुड अगर पाकिस्तान के खैबर पख्तूख्वाह में पैदा होते, तो वो भी उसी तरह के तीर और कमान से खेलते जैसा यहां के लोग खेलते हैं.

खैबर पख्तूख्वाह में हजारों वर्षों से तीरंदाजी का खेल खेला जाता रहा है जिसे वहां की स्थानीय भाषा में 'मोख़ा' कहते हैं.

ये कहना गलत नहीं होगा कि तीरंदाजी का खेल वहां की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है.

इस खेल में तीरंदाजी के इस्तेमाल होने वाली कमान हिरण के सिंगों से तैयार की जाती है और उसे स्थानीय भाषा में 'दरवेशी गुलेल' कहा जाता है.

एक कमान की कीमत लगभग दो सौ डॉलर यानी दस हज़ार रूपए तक होती है.

इस खेल में निशानेबाजी के लिए मिट्टी के एक टीले पर सतून बनाकर टारगेट तय किया जाता है.

तीरंदाज एक तय दूरी लगभग 12 फीट की दूरी से उसे निशाना बनाने की कोशिश करता है. खेल में हिस्सा लेने वालों के लिए कोई खास शर्त नहीं होती है और किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति इसमें हिस्सा ले सकता है.

इस खेल के लिए किसी खास मैदान या स्टेडियम की भी जरूरत नहीं होती है और किसी भी खुले मैदान में इस खेल का आयोजन किया जा सकता है.

पिछले दिनों मोखा या तीरंदाजी मुकाबले का आयोजन मालाकंड डिविजन के जिला बुनेर में किया गया.

इसमें एक से एक माहिर तीरंदाजों ने अपने खेल का जलवा दिखाया और दर्शकों से ढेर सारी वाह-वाही लूटी.

मदद की अपील

तीरंदाज़ी के खिलाड़ी और उसके समर्थक कहते हैं कि अगर सरकार इस खेल का समर्थन करे और आधिकारिक तौर पर इसको मान्यता दे दे तो ये खेल और भी लोकप्रिय हो जाएगा.

बुनेर के एक स्थानीय निवासी आमिर जेब कहते हैं, ''खैबर पख्तूख्वाह के पांच-छह जिलों में ये खेल खेला जाता है. लेकिन ये खेल इसलिए नहीं बढ़ पाता है क्योंकि सरकार इसकी तरफ ध्यान नहीं देती. इसके लिए कोई मैदान तय नहीं है, कोई आर्थिक मदद नहीं है.''

एक और स्थानीय निवासी कहते हैं कि इस खेल को राष्ट्रीय स्तर पर लाया जाना चाहिए.

लेकिन इन तमाम कमियों के बावजूद खैबर पख्तूख्वाह के विभिन्न जिलों के बीच तीरंदाजी मुकाबले का आयोजन किया जाता है जिन्हें देखने के लिए इस खेल के सैंकड़ो समर्थक जमा होते हैं.

सैकंड़ों लोगों के जमा हो जाने से मेले जैसा माहौल बन जाता है और उनके मनोरंजन के लिए संगीत का भी आयोजन किया जाता है.

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