मनमोहन सिंह के पाकिस्तानी गाँव में लोग उनके समर्थन में

आशिक हुसैन
Image caption मनमोहन सिंह के गाँव के आशिक हुसैन कहते हैं कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाना एक रिवाज सा बन गया है

हिंदुस्तान में कुछ लोग भारतीय प्रधानमंत्री के बारे में चाहे कुछ भी कहें, पाकिस्तान में उनके गाँव के लोग उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हैं.

“हम सोच भी नहीं सकते हैं कि इस गाँव की मिट्टी से उठने वाला शख़्स भ्रष्टाचार कर सकता है और वह काफी ईमानदार शख़्स है जिस पर शक़ नहीं किया जा सकता है.”

यह शब्द पाकिस्तान के एक छोटे से गाँव गाह के निवासी आशिक़ हुसैन ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा में कहे हैं.

गाह पंजाब के ज़िले चकवाल का एक छोटा सा गाँव है और इसी गाँव में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्म हुआ था. यहीं पर उन्होंने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की.

भारत में भ्रष्टाचार के कई मामलों के लिए मनमोहन सिंह सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. साथ ही उनकी ईमानदारी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.

लेकिन उनके गाँव के निवासी कहते हैं कि मनमोहन सिंह की ईमानदारी और सच्चाई को शक़ की निगाह से नहीं देखना चाहिए और उन पर लगे भ्रष्टाचार के तमाम आरोप निराधार हैं.

आशिक़ हुसैन कहते हैं, “एक ऐसा शख़्स जब प्रधानमंत्री बनता है तो शपथ लेते समय उनके पास शेरवानी भी न हो तो क्या वह भ्रष्टाचार कर सकता है? ये तो यहाँ का एक रिवाज बना गया है.”

'अच्छा खानदान'

उनके मुताबिक़ मनमोहन सिंह का अच्छा ख़ानदान था और गाँव वाले सोच भी नहीं सकते हैं कि वो भ्रष्टाचार कर सकते हैं.

67-वर्षीय शेर ज़मान मनमोहन सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताते हैं और कहते हैं कि भ्रष्टाचार का तो पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीटा जा रहा है और विकसित देशों में भी ऐसे मामले चल रहे हैं, लेकिन जब तक सबूत न हों, इस तरह के आरोप लगाना ठीक नहीं है.

वह कहते हैं, “हमने कई ऐसे मामले देखे हैं. इससे पहले नरसिम्हा राव थे और उनके ख़िलाफ़ भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे लेकिन कोई भी ये आरोप साबित नहीं कर सका. अब मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ आरोप लगाए जा रहे हैं. ये भी साबित नहीं होंगे.”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सरकार पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लग चुके हैं और अब ऐसे आरोप लगाना आम बात हो गई है.

53-वर्षीय मोहम्मद नवाज़ भी भारतीय प्रधानमंत्री की ईमानदारी की तारीफ़ करते हैं और कहते हैं कि उनके छोटे से गाँव का निवासी कभी भी भ्रष्ट नहीं हो सकता है.

वह कहते हैं, “हमारे बुजुर्ग जो उनके साथ खेले हैं, उनके साथ पढ़े हैं, वो बताते हैं कि उनका परिवार बहुत शरीफ़ था. वो ख़ुद भी काफी ईमानदार थे और पढ़ाई में दिल लगा कर पढ़ते थे.”

नवाज़ मानते हैं कि मनमोहन सिंह को गाँव छोड़े कई साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी गाँव वालों को चिट्ठियाँ लिखते हैं और उनके प्रति अच्छा रवैया है, इसलिए गाँव वाले यह सोच भी नहीं सकते कि वो भ्रष्ट हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि इस छोटे गाँव से काफी लोग पाकिस्तान में बड़े-बड़े पदों पर रहे हैं लेकिन किसी पर न तो भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और न ही कोई साबित कर सका है.

वह कहते हैं, “वो दुनिया एक बड़े मुल्क के प्रधानमंत्री हैं लेकिन उन्होंने अपने छोटे से गाँव के ग़रीब लोगों को याद रखा हुआ है. मैं तो ये कहता हूँ कि ये केवल आरोप ही हैं.”

आशिक का कहना है कि उन्हें भारत के बारे में ज़्यादा पता नहीं है लेकिन वह मनमोहन सिंह और उनके परिवार को अच्छी तरह से जानते हैं और ऐसा परिवार कभी भी भ्रष्ट नहीं हो सकता है.

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