पाकिस्तान मुख्य न्यायाधीश के बेटे पर कार्रवाई के आदेश

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Image caption इस मामले में मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी के बेटे अरसलान इफ्तिख़ार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के दिए हैं.

अदालत ने इस मामले में वरिष्ठ व्यापारी मलिक रियाज़ और उनके दामाद सलमान अहमद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का आदेश दिया है.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी के बेटे अरसलान इफ्तिख़ार पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था और अदालत ने इस मामले का नोटिस लिया था.

मलिक रियाज़ ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अपने मुकदमों में राहत हासिल करने के लिए अरसलान इफ्तिख़ार को क़रीब 34 करोड़ रुपय दिए थे.

वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस जव्वाद एस ख़्वाजा की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में घूस देने और धोखाधड़ी की धाराओं के अधीन कार्रवाई कर अभियुक्तों को सज़ा दी जा सकती है.

अदालत ने इस्लाम के पैग़ंबर मोहम्मद की हदीस यानी उनकी कही हुई बातें को दोहराया, जिसमें कहा गया है कि रिश्वत देने वाला और रिश्वत लेने वाला दोनों नर्क में जाएँगे.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कोई भी अभियुक्त कितना प्रभावशाली क्यों न हो या किसी शक्तिशाली व्यक्ति का बेटा ही क्यों न हो, उनके ख़िलाफ़ भी कानून के मुताबिक़ कड़ी कार्रवाई होगी.

अदालत ने अटर्नी जनरल इरफान क़ादिर को आदेश दिया कि तीनों अभियुक्तों अरसलान इफ्तिख़ार, मलिक रियाज़ और सलमान अहमद के ख़िलाफ़ कानून के मुताबिक़ कड़ी कार्रवाई की जाए.

व्यापारी मलिक रियाज़ के वकील ज़ाहिद बुख़ारी ने अदालत से आग्रह किया कि वह इस मामले की जाँच के लिए कोई आयोग का गठन करें या इस मामले को नेशनल अकाउनटिबिलिटी ब्योरो के पास भिजवा दें.

लेकिन अदालत ने वकील ज़ाहिद बुख़ारी की याचिका को रद्द कर दिया.

मलिक रियाज़

साथ ही अदालत ने कहा कि मलिक रियाज़ ने अपने बयान में कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी सहित तमाम न्यायाधीशों पर विश्वास करते हैं.

अदालत ने मलिक रियाज़ के बयान से एक हिस्सा भी पढ़ कर सुनाया कि इतनी रक़म ख़र्च करने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली है.

अदालत ने अपने फैसले में मलिक रियाज़ की ओर से जमा किए गए दस्तावेज़ों पर भी सवाल उठाए और कहा कि अरसलान इफ्तिख़ार के विदेशी दौरों पर जो डेढ़ करोड़ रुपय से ज़्यादा ख़र्च किए गए, उसके दस्तावेज़ पेश किए गए लेकिन 32 करोड़ रुपय की रक़म का कोई उल्लेख नहीं और न ही कोई दस्तावेज़ पेश किए गए.

अदालत ने कहा कि इस संबंध में मलिक रियाज़ ने अपने दामाद सलमान अहमद का बयान भी अदालत में पेश नहीं किया.

अपने फैसले में अदालत ने मीडिया पर कड़ी आलोचना की और कहा कि मीडिया ने तथ्यों को जानने की कोई कोशिश नहीं की.

अदालत ने कहा कि टीवी चैनलों को अपनी ज़िम्मेदारियों को समझते हुए तथ्यों को सामने रख कर प्रोग्राम करने चाहिएँ और मीडिया ऐसे लोगों के हाथों इस्लेमाल न हो जो क़ानून का सम्मान नहीं करते हैं.

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