सरबजीत सजा : स्वागत और निंदा साथ-साथ

 आसिफ अली ज़रदारी - मनमोहन सिंह इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption जरदारी के इस फैसले को भरत-पाक के बीच विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की ओर से लाहौर की जेल में कैद भारतीय नागरिक सबरजीत सिंह की मौत की सजा को उम्र क़ैद में तबदील करने के फैसले को स्वागत के साथ साथ निंदा का भी सामना करना पड़ा है.

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने बीबीसी से बातचीत करते हुए इस फैसले को भारत और पाकिस्तान के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति ज़रदारी का शुक्रिया अदा करता हूँ और उन्होंने बहुत ही बड़ा काम किया है.” उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी को करीब एक हफ्ते पहले सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए एक अपील की थी, जिसमें कहा गया कि सरबजीत सिंह को गलती से पकड़ा गया था.

'अमन को मज़बूती'

भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से ही अमन को मज़बूती मिलती है और लोगों एक दूसरे के करीब आते हैं. बर्नी ने कहा, “अब दोनों देशों के बीच यही बातें हो रही हैं कि हम ज़िंदा लोगों की बातें करें न कि एक दूसरों को शव भेजे. मैं यह समझा हूँ कि अब वक़्त आ गया है कि अब इंसानियत की बात करें.” दोनों देशों के संबंधों को मज़बूत करने का श्रेय उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी को दिया और कहा कि उनकी कोशिशों से ही दोनों देशों के लोग अब करीब आ गए हैं. केंद्रीय मंत्री शेख वकास का कहना है कि उनकी सरकार भारत और पाकिस्तान के आम लोगों की करीब लाने की कोशिश कर रही है और इस लिए इस प्रकार के फैसले लिए जा रहे हैं.

'खलील चिश्ती का असर'

केंद्रीय मंत्री शेख वकास ने कहा कि सरबजीत के मामले को विस्तार के पढ़ने के बाद पता चलता है कि उनकी रिहाई से पाकिस्तान को कोई नुक़सान नहीं है बल्कि फायदा है.

उन्होंने कहा, “जब भारत पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर खलील चिश्ती को रिहा किया था और वह स्वदेश लौटे थे तो उसके बाद पाकिस्तानी सरकार पर अतंरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया था कि वह सरबजीत सिंह जैसे क़ैदियों को रिहा करे.” शेख़ वकास के मुताबिक़ सरबजीत सिंह की रिहाई से दूसरे कैदियों को रिहा होने की उम्मीद होगी जो दोनों देशों की जेलों में कई सालों से क़ैद हैं. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरबजीत सिंह ने अदालत की ओर से दी गई अपना सज़ा पूरी कर ली है लेकिन पाकिस्तान में तो आतंकवादियों को न्याय मिल रहा है. उन्होंने बताया कि कई ऐसे लोगों ने जिन्होंने जज के सामने माना है कि उन्होंने लोगों को मारा है वह भी तो खुले आम घूम रहे हैं.

नाराजगी

दूसरी ओर विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के वरिष्ठ नेता ख़्वाजा साद रफीक ने राष्ट्रपति ज़रदारी के फैसले का कड़ा विरोध किया और कहा कि इस तरह के फैसले पाकिस्तान के लिए नुकसानदायक हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी सरकार किसी देश के साथ संबंध बहतर करने के लिए एक आतंकवादी को रिहा करेगी तो क्या बम धमाके करने वाले अन्य आतंकवादियों के साथ भी नरमी बरती जाएगी. उनके मुताबिक़ अब पाकिस्तानी सरकार को अजमल आमिर कसाब की रिहाई के लिए भी भारत से बात करनी चाहिए.

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