'ओसामा आयोग': आईएसआई द्वारा गवाहों को तंग करने की जाँच

ओसामा बिन लादेन का घर इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption अमरीकी सैनिकों ने ख़ुफ़िया कार्रवाई कर ऐबटाबाद के इसी घर में ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

पाकिस्तान में अल क़ायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत की जाँच कर रहे न्यायिक आयोग ने जाँच में मदद देने वाले व्यक्तियों को तंग करने और उन पर दबाव डालने की घटनाओं की जाँच का आदेश दिया है.

पिछले साल दो मई को अमरीकी सैनिकों ने ऐबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई कर ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

न्यायिक जाँच आयोग में शामिल एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के दौरान यह बात सामने आई कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया ऐजेंसियाँ विशेष तौर पर आईएसआई आयोग के समक्ष पेश होने वाले गवाहों को रास्ते में रोक कर उनसे पूछताछ करती हैं.

उन्होंने कहा कि न्यायिक जाँच आयोग के प्रमुख जस्टिस जावेद इक़बाल ने इस ख़बर पर निराशा जताई और ग़ुस्सा करते हुए उसे आयोग के मामलों में हस्तक्षेप क़रार दिया.

अधिकारी के मुताबिक़ कुछ महीनों के दौरान जाँच आयोग के सामने पेश होने वाले कुछ अहम गवाहों ने आयोग को बताया कि आयोग के सामने पेश होने से पहले आईएसआई के अधिकारी उन्हें तलब कर सवाल पूछते हैं और उनकी मर्ज़ी का जवाब देने के लिए भी कहते हैं.

आईएसआई की पूछताछ

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता आसिफ़ फ़ारूक़ी के मुताबिक़ यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब ऐबटाबाद स्थित ओसामा बिन लादेन के निवास के पास रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी गवाही के लिए आयोग के सामने देरी से पहुँचा.

आयोग के पूछने पर उस व्यक्ति ने बताया कि उन्हें रास्ते में आईएसआई के अधिकारियों ने रोक कर पूछताछ की, जिसकी वजह से उन्हें आयोग के सामने पेश होने में देरी हुई.

जाँच आयोग के प्रमुख जस्टिस जावेद इक़बाल ने इस मामले का नोटिस लिया और अन्य गवाहों से भी इस बारे में पूछा तो यह बात सामने आई कि आईएसआई के अधिकारी कुछ गवाहों को आयोग के सामने पेश होने के बाद भी तलब करते हैं.

उनमें से कुछ गवाहों ने आयोग के बताया कि आईएसआई के अधिकारी उनसे पूछते रहे कि आयोग ने उनसे क्या पूछा और उन्होंने क्या जवाब दिया.

पाकिस्तान पर दबाव

पाकिस्तानी सरकार ने उस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी कि अमरीका ने उस कार्रवाई के लिए उन्हें कोई जानकारी नहीं दी थी.

दूसरी ओर घरेलू स्तर पर भी सरकार और ख़ुफ़िया ऐजेंसी आईएसआई पर कड़ी आलोचना हो रही थी कि उस कार्रवाई की सरकार और आईएसआई को जानकारी क्यों नहीं हुई.

बाद में सरकार ने ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूगी और अमरीकी कार्रावाई में हुई मौत की जाँच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया था.

इस जाँच आयोग ने अब तक सैंकड़ों लोगों के बयान रिकॉर्ड किए हैं, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, नेता और अन्य लोग शामिल हैं.

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