ओसामा अभियान का साया, 'विदेशी कर्मचारी' निष्कासित

 गुरुवार, 6 सितंबर, 2012 को 18:41 IST तक के समाचार

सेव द चिल्ड्रन की तरह कई अन्य संस्थाओं के कर्मचारियों ने भी काम में कुछ पाबंदियों की शिकायत की है

पाकिस्तान में सक्रिय बाल कल्याण कार्यों में जुटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' के विदेशी कर्मचारियों को दो हफ्ते के भीतर देश से चले जाने के लिए कहा गया है.

इस्लामाबाद से संस्था ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि उसे कोई कारण नहीं बताया गया है लेकिन ये जरूर कहा गया है कि इस अवधि में उसके सभी विदेशी कर्मचारी देश छोड़कर चले जाएँ.

माना जा रहा है कि अल कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खिलाफ जब अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक अभियान चलाया था और फिर इससे जुड़े एक डॉक्टर शकील अफ्रीदी ने एक टीकाकरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, तो उससे इस संस्था का भी संबंध था.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल:

"ऐबटाबाद में ओसामा के निवास पर हुए हमले के बाद डॉक्टर शकील अफ्रीदी को गिरफ्तार कर लिया गया था क्योंकि ये पाया गया था कि उन्होंने अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए एक फर्जी टीकाकरण अभियान चलाया था. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने सेव द चिल्ड्रन पर इससे किसी तरह के संबंध का आरोप लगाया था"

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल

उधर 'सेव द चिल्ड्रन' ऐसे सभी आरोपों का लगातार खंडन करती आई है.

तीस साल से पाक में सक्रिय संस्था

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल के मुताबिक, "ऐबटाबाद में ओसामा के निवास पर हुए हमले के बाद डॉक्टर शकील अफ्रीदी को गिरफ्तार कर लिया गया था क्योंकि ये पाया गया था कि उन्होंने अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए एक फर्जी टीकाकरण अभियान चलाया था. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने सेव द चिल्ड्रन पर इससे किसी तरह के संबंध का आरोप लगाया था. "

डॉक्टर अफ्रीदी को मई में 33 साल की जेल की सज़ा हुई थी और पश्चिमी देशों, विशेष तौर पर अमरीका की ओर से इसकी कड़ी आलोचना हुई थी. उनके परिवार ने इस फैसले का विरोध किया था और माना जा रहा है कि उनकी रिहाई के लिए अपील की जाएगी.

पाकिस्तान में 'सेव द चिल्ड्रन' संस्था के 2000 कर्मचारी है और उनमें से छह विदेशी हैं.

ये संस्था पाकिस्तान में पिछले 30 साल से काम कर रही है. जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार के इस कदम से संस्था के देश में कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

अलीम मक़बूल के मुताबिक विदेशी राहत संस्थाओं के कर्मचारियों ने पिछले डेढ़ साल में अपने कामकाज पर लगाई गई कई तरह की पाबंदियों की शिकायत की है.

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