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बुधवार, 18 जनवरी, 2006 को 13:29 GMT तक के समाचार

बेकाबू बंदरों को पकड़ने का अदालती निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तीस हज़ारी अदालत को बंदरों के उत्पात से एक महीने के अंदर मुक्ति दिलाएँ.

अदालत ने कहा कि बंदरों की वजह से अदालत के कामकाज पर काफ़ी असर पड़ रहा है और उन्हें तत्काल पकड़ा जाना ज़रूरी है.

जिस याचिका पर अदालत ने यह निर्देश दिया है उसमें शिकायत की गई है कि बंदर वकीलों और मुवक्किलों पर हमले कर रहे हैं और उनका सामान छीन रहे हैं जिससे आतंक का माहौल पैदा हो गया है.

दिल्ली में सिर्फ़ तीस हज़ारी अदालत ही नहीं, पूरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बंदरों से परेशान है और उन्हें भगाने की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं.

याचिका दायर करने वाले निर्मल चोपड़ा ने बताया कि तीस हज़ारी अदालत के वकीलों ने कई बार राज्य सरकार से अनुरोध किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा.

तीस हज़ारी एक बहुत बड़ा अदालत परिसर है जिसमें एक साथ 160 से अधिक अदालतें लगती हैं.

धमकी

जज विजेंद्र जैन और रेखा शर्मा ने अपने निर्देश में नगर निगम से कहा है कि "अगर आप लोग बंदरों को नहीं पकड़ सकते तो अदालत को बंद कर देना ही बेहतर रहेगा."

लेकिन इस काम में बहुत दिक्कतें आ रही हैं, एक बंदर पकड़ने वाले पर तो बंदरों ने ऐसा हमला किया उन्हें 72 टाँके लगाने पड़े. बंदर पकड़ने वाले इस काम का ठेका लेने को तैयार नहीं दिख रहे हैं.

दिल्ली के बंदर लोगों पर घरों में घुसकर हमले करने के लिए बदनाम हैं लेकिन पर्यावरणवादियों का कहना है कि बस्तियाँ बसाने के लिए बंदरों के घर उजाड़े गए हैं इसलिए बंदर आवासीय इलाक़ों में रहते हैं.

ऐसी अनेक घटनाएँ हो चुकी हैं जब बंदरों ने सरकारी कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है, टेलीफ़ोन के तार नोचने, सरकारी दस्तावेज़ फाड़ने और तोड़फोड़ करने में इन्हें कुछ ख़ास मज़ा आता है.

दो वर्ष पहले ही दिल्ली में रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने पाया कि उनके बेहद गोपनीय दस्तावेज़ यहाँ-वहाँ बिखरे पड़े हैं, यह भी बंदरों का ही कारनामा था.

पिछले दिनों एक कैबिनेट मंत्री अपने सरकारी बंगले में कई महीने तक घुस नहीं सके क्योंकि वहाँ बंदरों ने मोर्चाबंदी कर रखी थी.

हाल ये है राष्ट्रपति भवन को बंदरों से बचाने के लिए वहाँ डरावनी शक्ल वाले कई लंगूर तैनात किए गए हैं जो रीसस प्रजाति के इन बंदरों को भगाते रहते हैं.