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सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन ने बुधवार को झारखण्ड के छठे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में दिलवाई. सोरेन के अलावा 11 अन्य विधायकों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली. शपथ लेने वालों में पूर्व उपमुख्य मंत्री स्टीफ़न मरांडी के अलावा सभी निर्दलीय विधायक शामिल हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कमलेश सिंह, फॉरवर्ड ब्लॉक की अपर्णा सेनगुप्ता और भानु प्रताप साही ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली. अब शिबू सोरेन को पहली सितंबर तक विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना है. शपथ ग्रहण समारोह के बाद सोरेन ने कैबिनेट की बैठक बुलाई. झारखंड ने पिछले तीन सालों में चार मुख्यमंत्री देखे हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था. इसी वजह से झारखंड में सत्ता की बागडोर निर्दलीय विधायकों के हाथों में चली आई.
2005 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्यपाल ने सबसे पहले शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. मगर निर्दलीय विधायकों ने सोरेन का समर्थन नहीं किया था और वो सदन में अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर पाए थे. उसके बाद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार निर्दलीय विधायकों के समर्थन से बनी मगर कुछ ही दिनों में निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा से अपना समर्थन वापस ले लिया. निर्दलीय विधायक मधु कोडा के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार का गठन हुआ जिसे राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था. संसद में मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के एवज़ में शिबू सोरेन को झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी यूपीए की तरफ़ से तोहफे के रूप में मिली और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 23 महीने पुरानी कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेते हुए ख़ुद सरकार बनाने का दावा पेश कर कर दिया. काफ़ी उलटफेर के बाद शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की सहमति बनी और निर्दलीय विधायकों ने आखिरकार उन्हें समर्थन दे दिया. मधु कोडा शिबू सोरेन के मंत्रिमंडल से बाहर हैं. उन्हें झारखंड में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की स्टीयरिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस कुर्सी पर पहले शिबू सोरेन हुआ करते थे . अब शिबू सोरेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वो किस तरह अपने कुनबे को एकजुट रखते हैं. फ़िलहाल उन्हें 42 विधायकों का समर्थन हासिल है जो सदन में बहुमत के लिए 41 के जादुई आंकडे से एक ज्यादा है. हालाँकि शिबू सोरेन का दावा है कि उन्हें और भी विधायकों का समर्थन हासिल है जिसे वो सदन में साबित करेंगे, सरकार का सारा दारोमदार निर्दलीय विधायकों के हाथों में ही है. |
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