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बुधवार, 29 अप्रैल, 2009 को 15:16 GMT तक के समाचार

विनीत खरे
बीबीसी संवाददाता, गुजरात से

गुजरात चुनाव में चर्चा मोदी के इर्द-गिर्द

भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात का ज़िक्र होते ही बात होती है राज्य के सांप्रदायिक माहौल की, हिंदू मुस्लिम संबंधों की, गुजरात के बाहर राज्य की छवि की, विवादों से घिरे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की, साथ ही तेज़ी से होते विकास और औद्योगीकरण के दावों की, वाइब्रेंट गुजरात की और ब्रैंड नरेंद्र मोदी की.

इन्हीं विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए बीबीसी की विशेष चुनाव कवरेज के अंतर्गत राजधानी अहमदाबाद के कर्णावती क्लब में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया.

इसमें हिस्सा लिया भाजपा नेता और स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास, कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह, गाँधीनगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार डॉक्टर मल्लिका साराभाई और वरिष्ठ पत्रकार अजय उमट ने.

साथ ही मौजूद थे विभिन्न वर्गों से आए लोग जो नेताओं के सामने अपने सवाल रखना चाहते थे.

मोदित्व या हिंदुत्व

चर्चा की शुरुआत हुई उसी सवाल से—क्या है ब्रैंड मोदी या फिर मोदित्व और क्या ये हिंदुत्व से ऊपर है?

गुजरात में जिस तरह नरेंद्र मोदी की छवि पार्टी से भी ऊपर हो गई है, उससे ये सवाल उठना लाज़मी है. गुजरात के कई हिस्सों में लोग आपको बताएँगे कि वो भाजपा को नहीं नरेंद्र मोदी को वोट देते हैं.

नरेंद्र मोदी के नाम पर कई वेबसाइटें हैं जिसमें उन्हें गुजरात के एक विशाल छवि वाले नेता की तरह पेश किया जता है.

लोगों से कहा जाता है कि स्लोगन लिखें और उन्हें पुरस्कार भी दिए जाते हैं. इस पर भाजपा नेता जयनारायण व्यास का कहना था कि हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है और मोदित्व नेतृत्व का तरीका है.

चर्चा में डॉक्टर साराभाई का कहना था कि नरेंद्र मोदी के राज में ग़रीबों, अल्पसंख्यकों, और आदिवासियों के जीवन में सुधार नहीं हुआ है.

वहाँ मौजूद एक छात्र हार्दिक का कहना था कि वो नरेंद्र मोदी से खुश नहीं हैं क्योंक वो नरेंद्र मोदी के विचारों से ख़ुद को जुड़ा महसूस नहीं करते हैं.

इस पर जयनारायण व्यास ने कहा कि जैसी जनता होगी, वैसा ही नेता उसे मिलेगा. कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह का कहना था कि भाजपा ने धर्म की राजनीति की है और समाज को तोड़ कर और लोगों की भावनाओं से कथित तौर पर खिलवाड़ कर पाए हैं.

ग़लत नीतियाँ

अजय उमट ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस की ग़लत नीतियों जैसे पार्टी की सांप्रदायिक राजनीति का भरपूर फ़ायदा उठाया है.

बात उठी कि कांग्रेस के अंदर भी कमज़ोरियाँ हैं, इसके अंदर गुटबाज़ी है, शंकरसिन्ह वाघेला और अहमद पटेल जैसे नेताओं के अपने गुट हैं जिससे भाजपा को फ़ायदा होता है.

लेकिन सवाल ये कि 2002 के गोधरा प्रकरण के बाद गुजरात में फैली हिंसा पर राष्ट्रीय मीडिया ने राज्य सरकार की भरपूर आलोचना की, लेकिन उसके बावजूद नरेंद्र मोदी की सरकार को चुना गया. आखिर इसका क्या कारण है?

इस पर अजय उमट का कहना था कि कांग्रेस गोधरा प्रकरण से बाहर नहीं निकल रही है और उसी एस-6 डिब्बे में ही फंस कर रह गई है जबकि मोदी आगे बढ़ चुके हैं और इसका ख़ामियाज़ा कांग्रेस को भुगतना पडा है.

सवाल गोधरा के बाद गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी के कथित रोल पर भी आया. उस पर जयनारायण व्यास ने कहा,"एक दफ़ा आप एक रंगीन चश्मा पहन लेते हैं और उसी चश्मे से 1992 के बाद गुजरात को देखने का प्रयत्न कर रहे हैं, मैं समझता हूं तकलीफ़ आपके चश्मे में है. चश्मा उतारिए तो आपको सही दिख जाएगा."

डॉक्टर साराभाई ने कहा कि गोधरा के बाद के वक्त में कांग्रेस का असर कई नगरमहापालिकाओं में था लेकिन अपने असर वाले इलाकों में भी कांग्रेस दंगों को रोक नहीं सकी.

मेडिकल के छात्र जोशल पटेल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब भी नरेंद्र मोदी का ज़िक्र होता है तो क्यों सिर्फ़ दंगों की ही बात होती है, क्यों नहीं बात होती है उन हितकारी योजनाओं की जो मोदी ने गरीबों के लिए शुरू की जैसे ज्योतिग्राम योजना, ई-ग्राम योजना औऱ चिरंजीवी योजना.

उनका कहना था कि कांग्रेस को मोदी की ओर इशारा करने से पहले अपने दामन में भी झांक लेना चाहिए.

एक और छात्र की तरफ़ से ये कहा गया कि नरेंद्र मोदी काम करते हैं उसका प्रचार ज़्यादा करते हैं.

विकास का दम

जयनारायण व्यास ने प्लानिंग कमीशन का हवाला देते हुए कहा कि उसका कहना है कि गुजरात में देश के औसत विकास से ज़्यादा हुआ है. उनका दावा था कि चिरंजीवी योजना के तहत 92 प्रतिशत डिलीवरी अस्पतालों में हो रही है.

कांग्रेस नेता हिम्मत सिंह ने किसानों की आत्महत्या और हीरा उद्योग से हज़ारों लोगों के बेरोज़गार हो जाने का मुद्दा उठाया और भाजपा के विकास के दावों को झूठा करार दिया.

उनका कहना था कि राज्य में नीति बड़े उद्योगपतियों के लिए बनती हैं ना कि आम आदमी के लिए. उन्होंने कहा," गुजरात हमेशा से ही विकासशील रहा है और नरेंद्र मोदी का कोई विशेष योगदान इसमें नहीं है."

यानि सवाल ये कि क्या ये कहना कि नरेंद्र मोदी जबसे सत्ता में आए हैं तबसे तेज़ी से विकास हुआ है, ये सही है? और क्या ये सच है कि नरेंद्र मोदी ने विकास को अपना मुद्दा इसलिए बनाया है ताकि 2002 के दंगों को छवि को छुपाया जा सके?

पत्रकार अजय उमट कहते हैं कि नरेंद्र मोदी बहुत अच्छे मार्केटिंग मैनेजर भी हैं. वो कहते हैं कि अगर कांग्रेस कहती है कि केंद्र ने सरकार को विकास के लिए ढेर सारा पैसा दिया है तो क्यों वो गुजरात में लोगों को इसका विश्वास नहीं दिला पाई.

एक और मुद्दा जिसकी चर्चा हुई वो था आसाराम बापू के आश्रम में दो बच्चों की रहस्यमय तरीके से मौत.. लोगों का कहना था कि ना ही लाल कृष्ण आडवाणी और ना ही नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर लोगों की सुध ली और उनके परिवार से संवेदना जताई.

चांदनी पटेल ने सवाल रखा कि बच्चों की रहस्यमय मौत के कारणों को आज तक क्यों पता नहीं चला. इस मुद्दे पर लोगों में भारी रोष था और उन्होंने जयनारायण व्यास से इसी बाबत सवाल पूछे. जयनारायण व्यास ने कहा कि न्याय प्रक्रिया अपना काम कर रही है और आडवाणी के उस वक़्त आने से लोकमत प्रभावित हो सकता था.

नहीं ली लोगों की सुध...

पारुल पटेल ने शिकायत थी कि आडवाणी लोगों की सुध नहीं लेते और उन्होंने गुजरात के लिए कुछ नहीं किया है. लोगों ने पूछा कि वो क्यों आडवाणी को चुने.

पत्रकार अजय उमट ने कहा, "लाल कृष्ण आडवाणी ने ग़लती की कि वो उस वक़्त अपने चुनाव क्षेत्र में नहीं आए. उस वक़्त उन्हें आना चाहिए था क्योंकि उस वक़्त वहाँ के लोग चाहते थे कि आडवाणी वहाँ आएं और परिवार के साथ संवेदना जताएं. लोगों को ऐसा लगा कि सरकार को जो पारदर्शिता दिखानी चाहिए थी, वो उसने नहीं दिखाई."

तो क्या मुद्दे हैं गुजरात में लोगों के? अजय उमट कहते हैं कि गुजरात के लोग अब दंगों के आगे देखना चाहते हैं, लेकिन साथ ही ये बात भी है कि गोधरा कांड के शिकार के लोगों को आजतक न्याय नहीं मिला है.

वे कहते हैं, "कुछ ग़ैर-सरकारी संगठनों ने मेहनत की है, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ़ से कुछ नहीं किया है. जाँच रिपोर्टों पर राजनीति होती रहती है. कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को और भाजपा हिंदू वोट बैंक को भुनाती रहती है और इसलिए दोनों ही पार्टियों का जनाधार कम हो रहा है और तीसरा औऱ चौथा मोर्चा यहाँ आ रहा है. "

चर्चा में भाग ले रहे एसएस खान ने डॉक्टर साराभाई पर सवाल दागा कि अगर वो चुन भी ली जाती हैं तो वो अकेले क्या कर पाएंगी.माना जा रहा है कि मल्लिका साराभाई कांग्रेस के वोट काटेंगी जिसका फ़ायदा अंत में भाजपा को ही होगा.

इस पर उन्होंने कहा," मैं अकेली नहीं हूँ और गुजरात के लोग मेरे पक्ष में हैं, और मैं नए वोटर्स लाऊँगी जो मुझे वोट देंगे. मैने पिछले तीस दिनों में ढाई लाख गुजरातियों के साथ बात की है. 140 गाँवों में जाकर मैने लोगों की समस्याओं को लिखा है."

यानि करीब 51 मिनट चली इस ज़ोरदार बहस में लोगों ने जमकर हिम्मत सिंह, जयनारायण व्यास से सवाल पूछे और मुद्दों पर विचार रखे. पर क्या पार्टियाँ इन मुद्दों पर ध्यान देंगी?