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शनिवार, 02 मई, 2009 को 10:32 GMT तक के समाचार
 
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'बाबरी मुद्दे पर भाजपा के धोखे में आ गया'
 

 
 
कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव

लोकसभा चुनावों में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुसलमानों पर सबकी नज़र है. इसका एक बड़ा कारण है- भाजपा के पूर्व नेता कल्याण सिंह और समाजवादी नेता मुलायम सिंह की निकटता.

कल्याण सिंह अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय राज्य के मुख्यमंत्री थे. आज वे एटा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से समाजवादी पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार हैं. उनका चुनाव चिन्ह है गिलास. पेश हैं कल्याण सिंह के साथ बीबीसी की विशेष बातचीत के मुख्य अंश:

अपने इतने लंबे राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में भी रहे. अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. आपके जीवन का गिलास भरा है या ख़ाली?

हमारा दिल भी भरा है, समाजवादी पार्टी का दल भी भरा है और हमारा चुनाव चिन्ह गिलास भी ऊपर तक लबालब है. ये बात सही है कि जब मैं भाजपा का उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष बनाया गया तब पार्टी की विधानसभा में महज़ आठ सीटें थीं. मैंने घूम-घूम कर पार्टी को दो बार राज्य में सत्ता दिलाई, 80 लोकसभा सीटों में से 65 सीटें दिलाईं और अटल जी पहली बार प्रधानमंत्री बने. भाजपा ने सदा मेरे साथ धोखा किया.

 कोई मुख्यमंत्री नहीं चाहता कि उसके कार्यकाल में इतनी बड़ी घटना हो. मैं भी भाजपा नेताओं के धोखे में आ गया और सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दे दिया कि मस्जिद को बचाने के सभी इंतज़ाम हैं. इन लोगों ने मुझे कहा था कि कुछ नहीं होगा
 
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

मैंने राष्ट्रीय क्रांति दल बनाया और भाजपा की सीटें विधानसभा में आधी रह गईं. पार्टी मुझे वापस बुलाकर ले गई. मैं मानता हूँ कि भाजपा में लौटना मेरी भूल थी.

अब तय किया है कि आजीवन भाजपा में नहीं लौटूँगा. भाजपा का ग्राफ़ नीचे की तरफ़ जा रहा है, ये नहीं रुकेगा. सोच-समझकर मुलायम सिंह यादव के साथ दोस्ती की है और दोस्ती में कोई शर्तें नहीं होतीं.

ये दो व्यक्तियों की दोस्ती नहीं है. दो राजनीतिक शक्तियों की दोस्ती है और इससे सामाजिक क्रांति का सूत्रपात हो रहा है.

एक ज़माने में आप हिंदू ह्रदय सम्राट कहे जाते थे और मुलायम सिंह को मौलाना मुलायम सिंह कहा जाता था. आप दोनों का रिश्ता तो बेर और केर का था, तो दोस्त कैसे हो गए?

ये बेर और केर की बात नहीं है. एक वर्ग ऐसा था जो मुझे मानता था और एक वर्ग ऐसा था जो मुलायम सिंह को बहुत महत्व देता था. अब जब हम दोनों एक हो गए हैं तो हमें एक-दूसरे के समर्थकों की मान्यता हासिल हुई है.

आपने अपना रास्ता छोड़ा या उन्होंने अपना रास्ता छोड़ा या दोनों ने अपना रास्ते छोड़ दिए?

किसी ने अपना रास्ता नहीं छोड़ा. रास्ता हमने नया अपनाया है. पिछले 60 साल की आज़ादी के बावजूद इस देश का जो 62 फ़ीसदी पिछड़ा तबक़ा है और नारी समाज है, उसे सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली है.

हम दोनों उस वर्ग को हिस्सेदारी दिलाने के लिए लड़ रहे हैं. हम दोनों मानते हैं कि देश में विकास के लिए शांति चाहिए. मैं अंदर की बातें जानता हूँ, बोलूंगा नहीं. भाजपा ने लोगों को जाति-धर्म-मज़हब के नाम पर लड़ाने का काम किया है.

 देश का जो 62 फ़ीसदी पिछड़ा तबका है और नारी समाज है, उसे सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली है. हम दोनों उस वर्ग को हिस्सेदारी दिलाने के लिए लड़ रहे हैं. मैं अंदर की बातें जानता हूँ, बोलूंगा नहीं. भाजपा ने लोगों को जाति-धर्म-मज़हब के नाम पर लड़ाने का काम किया है
 
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

उर्दू अख़बारों में विज्ञापान आ रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह का दिल बदल दिया है. आप किस तरह से देखते हैं?

कोई मुख्यमंत्री नहीं चाहता कि उसके कार्यकाल में इतनी बड़ी घटना हो. मैं भी भाजपा नेताओं के धोखे में आ गया और सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दे दिया कि मस्जिद को बचाने के सभी इंतज़ाम हैं. इन लोगों ने मुझे कहा था कि कुछ नहीं होगा.

मैं इसीलिए कहता हूँ कि बाबरी मुद्दा बड़ा संवेदनशील है. या तो हिंदू और मुसलमान बैठ कर इसका फ़ैसला करें या फिर सुप्रीम कोर्ट इसे हल करे.

आज़म खान सहित कई मुसलमान नेता कह रहे हैं कि आपने ख़ुदा का घर तोड़ा है?

 भाजपा में लौटना मेरी भूल थी. अब तय किया है कि आजीवन भाजपा में नहीं लौटूँगा. भाजपा का ग्राफ़ नीचे की तरफ़ जा रहा है, ये नहीं रुकेगा. बहुत सोच-समझकर मुलायम सिंह यादव के साथ हमने दोस्ती की है और दोस्ती में कोई शर्तें नहीं होती हैं
 
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

केवल वही लोग कह रहे हैं जिन्हें टिकट नहीं मिला. आज़म खान मेरा नाम ले रहे हैं जबकी उनकी परेशानी है जया प्रदा से.

मैं सभा में मुसलामानों से हाथ उठाने को कहता हूँ और पूछता हूँ मुलायम सिंह यादव तुम्हारे दोस्त हैं? फिर जब मैंने उनसे दोस्ती कर ली हैं तो दोस्त का दोस्त क्या होता है? इस हिसाब से मैं तुम्हारा दोस्त हुआ.

वो कहते हैं - हाँ. मैं कहता हूँ- मेरी और तुम्हारी दोनों की दुश्मन भाजपा है वो हम दोनों को मिटा देना चाहती है. जब मैं पूछता हूँ - दुश्मन का दुश्मन क्या हुआ तो वो कहते हैं - दोस्त. मैं पूछता हूँ कि मुझे वोट दोगे, वो कहते हैं- देंगे.

आम मुसलमान ने ये स्वीकार कर लिया है कि मेरी और मुलायम सिंह की दोस्ती सबके हित में है.

टीवी चैनलों पर बार-बार आपके कार्यकाल में हिंदू मुसलमान दंगों को क़ाबू में रखने के लिए एक पर चार वाली बात दिखाई जाती है, उसका क्या?

वो सब तो पुरानी बातें हो गईं, कुछ नई बात पूछो.

 
 
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