सर्जिकल स्ट्राइक में टेक्नोलॉजी कितनी अहम?

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दिन हो या रात, देश की सीमा पर नज़र रखने के लिए टेक्नोलॉजी काफी अहम भूमिका अदा करती है.

सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की मदद से सीमा पर दुश्मन पर नज़र तो रखी जाती ही है, लेकिन तरह-तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अब भारत पाकिस्तान के साथ सीमा पर घुसपैठ को कम करने या पूरी तरह रोकने की कोशिश कर रहा है.

सैटेलाइट और डिजिटल इमेजिंग की मौजूदा दुनिया में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए बहुत ही ज़बरदस्त तैयारी की ज़रुरत होती है. ऐसी टेक्नोलॉजी की मदद से किसी भी जगह को चुन कर सेना के जवानों को हमला करने की बिल्कुल सटीक जगह के बारे में जानकारी पहले से ही होती है.

एक बार टारगेट के बारे में पूरी तरह से जानकारी होने के बाद सेना पर ये निर्भर करता है कि वो कैसे अपना काम करते हैं.

इस हफ़्ते की सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी भले ही पिछले कुछ दिनों में हुई हो, लेकिन सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा से सीमा के पार हो रही तैयारियों पर नज़र रखना बहुत मुश्किल नहीं है. ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानि जीपीएस टेक्नोलॉजी से मैप के किसी भी इलाके के बारे में जानकारी लेना आजकल बहुत आसान है.

सैटेलाइट पर लगे लंबी दूरी तक नज़र रखने वाले कैमरे ज़मीन पर हो रही गतिविधि पर नज़र भी रख सकते हैं.

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किसी भी जगह सर्जिकल स्ट्राइक के पहले उसके बारे में पूरी जानकारी सेना और उनके आला अफसरों के पास होती है. ऐसी जानकारी सैनिकों को सैटेलाइट के ज़रिए 24 घंटे मिल सकती है. इसलिए दुश्मन पर नज़र रखने में ये टेक्नोलॉजी बहुत काम आती है. चीन ने ऐसा ही एक सैटेलाइट कुछ महीने पहले लॉन्च किया था.

24 घंटे नज़र रखने वाली टेक्नोलॉजी को कई लोग रोज़ इस्तेमाल करते हैं. गूगल ने सैटेलाइट से ये जानकारी इकट्ठा करके आम लोगों के लिए ट्रैफिक की जानकारी के लिए उसे इस्तेमाल किया है.

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रात को ऐसे लोगों और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए थर्मल इमेजिंग टेक्नोलॉजी काम में आती है. लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर थर्मल इमेजिंग से भी किसी भी चरमपंथी गुट की आवाजाही पर नज़र रखी जा सकती है.

किसी भी तरह की डिवाइस पर अंधेरे में भी इंफ़्रा रेड लाइट पड़ने से स्क्रीन पर अलग-अलग तरह के पैटर्न बन जाते हैं. जिस भी तरह के सामान पर ऐसी लाइट पड़ती है उसके बाद एक सेकंड के तीसवें हिस्से में ऐसे पैटर्न बनना शुरू हो जाते हैं. एक ही इंफ़्रा रेड कैमरे पर ऐसे हज़ारों पैटर्न और इमेज बन सकते हैं, जिसकी वजह से बॉर्डर से कई सौ किलोमीटर दूर बैठ कर कंट्रोल रूम में दूसरी किसी भी जगह के बारे में बहुत बढ़िया तस्वीर सामने उभर कर आती है.

सीमा के पास सीमा सुरक्षा बल की मदद के लिए 'लेज़र वॉल' भी अब लगाया गया है. सीमा पर कई ऐसी जगह हैं जहां पर कंटीले तार लगाना संभव नहीं है. कुछ जगह कंटीले तार लगाने के बाद साल के कुछ हिस्से में वो बर्फ से ढक जाता है या फिर सीमा के काफी पास नदियों के होने से वहां तार लगाना मुश्किल है.

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ऐसी जगहों पर लेज़र वॉल काम आता है. कुछ ख़बरों के मुताबिक जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में आठ जगहों पर ऐसे लेज़र वॉल लगाए गए हैं. ऐसे वॉल लगाने के लिए सीमा पर 45 स्थान चुने गए हैं.

ऐसे लेज़र वॉल को भी सैटेलाइट के ज़रिए 24 घंटे काम पर लगाया जाता है और अब सीमा पर कड़ी निगरानी रखना संभव है.

इन सभी टेक्नोलॉजी की मदद से एक कंट्रोल रूम तक जानकारी पहुंचती है जिससे देश के किसी भी कोने में बैठ कर सेना के लोग अपना काम कर सकते हैं. इसीलिए सेना की ज़रुरत के लिए स्पेक्ट्रम, जिसे टेलीकॉम कंपनियां भी ज़्यादा चाहती हैं, काफी ज़रूरी होता है.

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दिन में कई बार आसानी से दुश्मन पर नज़र रखी जा सकती है. लेकिन रात को काम करने वाले कैमरे की मदद से दुश्मन पर भी नज़र रखना बहुत मुश्किल नहीं है. कई ऐसे कैमरे होते हैं जो सिर्फ रात को काम करने के लिए होते हैं और कम से कम लाइट में भी तस्वीर ले सकते हैं.

ऐसे कैमरे से ली गई तस्वीरें आम लोगों की समझ में शायद नहीं आएं लेकिन जब दूसरी जानकारी के साथ उन्हें मिलाकर देखा जाता है तो दुश्मन के बारे में काफी कुछ समझ में आता है.

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फ़ौज की जानकारी की ज़रूरतों के लिए किसी भी देश के लिए अपना सैटेलाइट होना काफी अहम होता है. अपने सैटेलाइट नहीं होने पर ये जानकारी दूसरे देशों या उन देशों की कंपनियों से खरीदनी पड़ती है. लेकिन तरह तरह के डिवाइस जो सीमा के आस पास लगे हैं उनको अगर सैटेलाइट के ज़रिए कनेक्ट कर दिया जाए तो जानकारी 24 घंटे मिल सकती है.

सर्जिकल स्ट्राइक के समय कैमरे में जो तस्वीरें कैद की गई हैं वो भी सैनिकों के हेलमेट या दूसरी डिवाइस में लगा होता है. ये कैमरे सैटेलाइट के ज़रिए कंट्रोल रूम तक दुश्मन के इलाके की तस्वीरें भेजते हैं. ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए जब अमरीकी सील के जवानों ने हमला किया था तब ऐसे कैमरे का भी इस्तेमाल किया गया था.

एक बार इन सभी टेक्नोलॉजी से मिलने वाली जानकारी को इकट्ठा करके देखा जाता है तो ठीक जिस जगह दुश्मन पर हमला बोलना है या सर्जिकल स्ट्राइक करना है उसकी तस्वीर साफ़ हो जाती है.

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