क्या सर्जरी भारतीय को यूरोपियन बना सकती है?

Image caption शरण धालीवाल की सर्जरी के पहले और बाद की तस्वीर

ब्रिटेन के नस्ली लोगों में प्लास्टिक सर्जरी के ज़रिए अपना लुक बदलने का चलन बढ़ रहा है. ये लोग सर्जरी के ज़रिए अपनी पारंपरिक नस्लीय पहचान बदलकर ज्यादा पश्चिमी लगना चाहते हैं.

पिछले साल 51 हज़ार ब्रितानियों ने अपनी नाक, स्तन और बढ़े हुए पेट की सर्जरी करवाई जो एक रिकॉर्ड है. इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने अपनी नस्ल और मूल से जुड़ी खास पहचान को बदलने के लिए सर्जरी करवाई.

शरण धालीवाल अपने स्कूल के दिनों से ही अपनी खास भारतीय पहचान वाले चेहरे-मोहरे को नापसंद करती थीं और अपनी जड़ों को लेकर पछतावा करने लगी थीं.

स्कूल में कई साल तक पहचान को लेकर सताए जाने के बाद 22 साल की उम्र में शरण ने इस उम्मीद में प्लास्टिक सर्जरी करवाई कि उनकी भारतीय लगनेवाली नाक ज्यादा यूरोपीयन लगने लगे. उन्हें लगता था कि यूरोपीय लोगों की तरह दिखना ही सही है.

शरण बताती हैं, "मुझे बताया गया था कि मेरी नाक एकदम भारतीय लगती है. मेरी मां की नाक वैसी नहीं थी. मेरे परिवार के कई पुरुषों की नाक वैसी थी, लेकिन महिलाओं की नहीं."

जब शरण ने अपने माता-पिता को अपनी चिंता बताई तो उन्होंने उनका समर्थन किया और सर्जरी के लिए पैसे भी दिए.

Image caption शरण धालीवाल कहती हैं कि सर्जरी से केवल व्यक्ति में बाहरी बदलाव लाया जा सकता है.

उनकी मां नरिंदर धालीवाल ने बताया कि उनकी बेटी ने जो समस्या महसूस की, वही समस्या उन्होंने भी महसूस की थी जब वो इंग्लैंड आई थीं.

वो कहती हैं, "जैसी नाक शरण की है मेरी भी वैसी ही थी जब 35 साल पहले मैं इंग्लैंड आई थी. तब मैंने भी अपना ऑपरेशन करवाया था."

उसके बाद मैं लंदन में डॉक्टरों के पास ये पता लगाने गई कि क्या एक एशियाई दिखनेवाली नाक को यूरोपीयन लुक वाली नाक में बदलना संभव है?

मेरी मुलाक़ात प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर नवीन कवाले से हुई. उन्होंने बताया कि डॉक्टर नस्लीय पहचान को बदलने की बजाए सलाह देते हैं कि कुछ बदलाव कर चेहरे को कैसे आकर्षक बनाया जा सकता है.

Image caption ब्रिटेन में पिछले सालों में लुक में बदलाव के लिए प्लास्टिक सर्जरी का चलन काफी बढ़ा है

उन्होंने कहा, "एक अच्छा सर्जन आपको एशियाई से श्वेत यूरोपीयन बनाने की बजाए आपके ही चेहरे को निखारने की सलाह देगा. वो कहेगा कि देखिए आपकी नाक उभारी हुई है, उसे ठीक किया जा सकता है या फिर आपकी नाक का छेद बड़ा है, उसे छोटा बनाया जा सकता है."

हम आज एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां चारों तरफ़ आकर्षक चेहरे-मोहरे और काया वाले लोग नज़र आते हैं. हम सोशल मीडिया और टीवी में ऐसे लोगों को देखते हैं. यही वजह है कि आज के कई युवा उस आकर्षक और परिपूर्ण व्यक्तित्व को पाना चाहते हैं. लेकिन ये केवल सुंदर दिखने की चाह है या इसके पीछे कोई और वजह भी है.

मनोचिकित्सक डॉक्टर अनुराधा सायल बेनेट कहती हैं कि लोग सर्जरी के ज़रिए केवल अपना लुक ही नहीं निखारना चाहते बल्कि अपनी नस्ली पहचान को भी बदल देना चाहते हैं.

शरण धालीवाल को प्लास्टिक सर्जरी करवाए कई साल हो गए हैं, लेकिन क्या सर्जरी के ज़रिए अपने जीवन में जो बदलाव वो चाहती थीं, वो हासिल कर सकीं.

शरण कहती हैं, "अब मैं 32 साल की हूं और मुझे लगता है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को हटा पाना इतना आसान नहीं है."

दस साल के बाद शरण को लगता है कि नाक की सर्जरी करवा कर बाहरी तौर पर तो उन्होंने अपनी पहचान बदल ली है, लेकिन उनके भीतर की सांस्कृतिक पहचान को बदल पाना, भारतीय होने के एहसास को किनारे कर पाना सर्जरी जैसा आसान नहीं है.

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