काली महिलाओं में स्तन कैंसर अधिक, क्यों?

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इंगलैंड में काली महिलाओं में गोरी महिलाओं की तुलना में स्तन कैंसर की संभावना लगभग दोगुनी पाई गई है.

यूके कैंसर रिसर्च और इंगलैंड पब्लिक हेल्थ के नए शोध में 25 फ़ीसदी काली अमरीकी और 22 फ़ीसदी कैरेबियाई महिलाओं में स्तन कैंसर की बीमारी गंभीर चरण में पाई गई. उसकी तुलना में गोरी महिलाओं में यह आंकड़ा 13 फ़ीसदी था.

जानकारों के मुताबिक़ इस अंतर की कई वजहें हैं:

एक वजह है स्तन कैंसर के लक्षणों और स्क्रीनिंग से जुड़ी जागरुकता का बेहद कम होना.

यूके कैंसर रिसर्च के अनुसार जब औरतों को मेमोग्राफी यानी स्तन के एक्सरे के लिए बुलाया गया तो काली महिलाएं कम तादाद में आईं.

स्तन कैंसर की पहचान अगर शुरू में हो जाए तो इलाज बेहतर ढंग से किया जा सकता है.

लीड्स का एक समूह उन काली अफ्रीकी और कैरिबियाई महिलाओं की मदद करता है जिन्हें खुद ये कैंसर था या उनके जान-पहचान वालों को था.

एक काली महिला ने बीबीसी को बताया, "हममें से अधिकांश महिलाएं इस मामले में चुप्पी साध लेती हैं. मैंने भी यही किया. मुझे इसका इलाज कराने की ज़रूरत ही महसूस नहीं हुई."

दूसरी महिला ने कहा, "ऐसी कई सारी महिलाएं मिली हैं जिन्हें लगता तो है कि कुछ गड़बड़ है लेकिन वे किसी को बताती नहीं. बस ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि वो उन्हें ठीक कर दे."

2012-13 के आंकड़ें बताते हैं कि स्तन कैंसर के अधिकांश मामले शुरुआती चरण में ही पहचान में आ जाते हैं.

यूके कैंसर रिसर्च की जूली शार्प ने स्तन कैंसर की पहचान के बारे में आगाह किया है.

वे कहती हैं, "केवल गांठ ही स्तन कैंसर की पहचान नहीं है. उन्हें इस बात पर भी नज़र रखनी चाहिए कि कहीं उनकी छातियों में निप्पल से रिसाव या त्वचा में कोई बदलाव जैसी चीजें तो नहीं दिख रहीं."

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