'फ़ेसबुक ने चीन के लिए बनाया सेंसरशिप टूल'

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न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक फ़ेसबुक एक ऐसा विशेष सॉफ़्टवेयर तैयार कर रहा है जिससे ख़ास इलाक़ों और देशों से लोगों की न्यूज़ फ़ीड में आने वाली पोस्ट को कम अहमियत देकर दबाया या सेंसर किया जा सकता है.

इस ख़बर को ख़ास तौर पर चीन के संदर्भ में देखा जा रहा है जहाँ सेंसरशिप की बात बार-बार उठती है.

अख़बार का कहना है कि उसे फ़ेसबुक के तीन कार्यरत और पूर्व मुलाज़िमों से जानकारी मिली है कि इस फ़ीचर को इसलिए तैयार किया गया है कि ताकि फ़ेसबुक दोबारा चीनी बाज़ार में पैर जमा सके.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि ये फ़ीचर उन विचारों का हिस्सा है जिन पर चीन के संदर्भ में अन्य विचारों पर चर्चा हुई और ये भी संभव है कि ये असल में कभी आए ही नहीं.

सोशल नेटवर्किंग कंपनी ने सॉफ्टवेयर की मौजूदगी की ख़बर की ना पुष्टि की है और ना इनकार, लेकिन एक बयान में यह कहा है कि वो चीन को 'समझने और सीखने में लगी है.'

फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने कहा कि चीन को लेकर कंपनी की नीति से जुड़ा कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

बेहतर ऑनलाइन निजता की पैरवी करने वाले समूह इलेक्ट्रॉनिक फ़्रंटियर फ़ाउंडेशन ने बीबीसी से कहा कि ये परियोजना सुनने में काफ़ी चौंकाने वाली है.

ईएफ़एफ़ की ग्लोबल पॉलिसी एनालिस्ट इवा गैलपरिन ने कहा, ''फ़ेसबुक के कर्मचारियों को बधाई, जिन्होंने इस बात की जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स को दी. ये जानना सुखद है कि सिद्धांतों पर चलने वाले कुछ लोग अब भी हैं.''

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साल 2009 से चीन में फ़ेसबुक तक पहुंचने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये एक ऐसा सॉफ़्टवेयर डिजाइन है, जो असल लोकेशन 'छिपा' देता है और इंटरनेट से जुड़ी स्थानीय पाबंदियों को बाईपास कर जाता है.

फ़ेसबुक के दुनिया भर में 1.8 अरब एक्टिव यूज़र हैं और वो मौजूदा बाज़ारों के अलावा दुनिया के दूसरे हिस्सों में पहुंचने की कोशिश कर रहा है.

विकासशील देशों में इसका मतलब ग्रामीण इलाकों से जुड़ने के लिए नई टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग करना है.

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