इंटरनेट कनेक्टेड उपकरण हो सकते हैं ख़तरनाक

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

क्या आपके घर के टीवी, गेमिंग कॉन्सोल, फ्रिज और दूसरे इंटरनेट से कनेक्ट होने वाले डिवाइस सुरक्षा के लिहाज से ख़तरनाक हो सकते हैं?

यूरोप में कनेक्टेड दुनिया से जुड़े मामलों पर काम करने वाली संस्था एनीसा ने हाल ही में एन्क्रिप्शन के बारे में एक रिपोर्ट निकाली है.

वाई-फाई एन्क्रिप्ट न किया तो होगी मुश्किल

पुराने विंडोज डिवाइस आपके काम आ सकते हैं

इसमें ये कहा गया है कि कई देश की सरकारें चोरी छुपे घर में इस्तेमाल होने वाले सामानों में ऐसे डिवाइस लगा रही हैं जिससे लोगों पर नज़र रखने में उन्हें आसानी हो.

इमेज कॉपीरइट https://www.enisa.europa.eu/

ऐसे उपकरणों को 'बैकडोर डिवाइस' कहा जाता है. कंपनियों के लिए 'डिजिटल सिंगल मार्किट' यानी एक ही बाज़ार में काम करने के लिए ऐसा करना शायद ज़रूरी है.

स्मार्ट डिवाइस पर अब 'ब्राउज़र हैकिंग' का खतरा

एंड्रॉयड डिवाइस से मैलवेयर कैसे हटाएँ

लेकिन इस लिंक पर मौजूद रिपोर्ट की अगर मानें तो एक बार ऐसा कर दिया गया तो ये ग़लत हाथों में भी पड़ सकता है जिससे लोगों के लिए नया ख़तरा पैदा हो जाएगा.

एनीसा के अनुसार ऐसा करने से जो फ़ायदे हैं उससे कहीं ज़्यादा लोगों को नुक़सान हो सकता है.

ऐसे रोकें वेबसाइट पर खुद चलने वाले वीडियो

आपका स्मार्टफोन ज़्यादा गर्म तो नहीं हो रहा?

बैकडोर डिवाइस की वजह से मासूम लोग साइबर क्राइम का शिकार हो सकते हैं. इसके अलावा अगर आप विदेशी उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं तो हो सकता है कि आपकी निजी जानकारी विदेश की कंपनियों या सरकारों के हाथ पड़ जाए.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

दुश्मन देश इन जानकारियों का ग़लत इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे उपकरण न सिर्फ आम इंसानों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए ख़तरा पैदा कर सकते हैं.

स्मार्टफोन की लाइट आंखों के लिए बुरी

वायरस को स्मार्टफ़ोन पर आने से रोकें

एनीसा ने ये भी आशंका जाहिर की है कि साइबर क्राइम का शिकार होने पर आम लोगों को सज़ा हो सकती है क्योंकि उनके डिवाइस किसी ग़लत कामों के लिए इस्तेमाल होते हैं. अपराधी आपकी निजी तस्वीरें और वीडियो लीक कर सकता है.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

यही नहीं, आपके धन दौलत की जानकारी भी किसी अनजान शख़्स को लग सकती है.

सरकार भले ही ऐसे डिवाइस का इस्तेमाल देश की सुरक्षा के लिए करती हो लेकिन इससे निजता का हनन भी होता है.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

इस बात पर साल 2015 में भी बहस छिड़ी थी, जब अमरीका में एफबीआई ने एप्पल से गुजारिश की थी कि वो आई फोन को अनलॉक करे.

एप्पल ने ऐसी गुजारिश को लेकर सरकार को आगाह किया था, कि जिस बैकडोर के जरिए सरकार अपराध का पता लगाती है उसी तरीके का ग़लत इस्तेमाल अपराधी भी कर सकते हैं.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

कोई भी कंपनी प्राइवेसी पॉलिसी के तहत अपने ग्राहकों से वादा करती है कि वो उनकी निजी जानकारी को सार्वजनिक नहीं करेगी.

अगर वो सरकार के कहने पर किसी डिवाइस के जरिए ऐसी जानकारी लीक करेगी तो ये प्राइवेसी पॉलिसी के ख़िलाफ़ होगा. यही वजह है कि एप्पल ने एफबीआई की मदद करने से साफ इनकार कर दिया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे