जब फ़ेसबुक से फैली 'विस्फोट' की ग़लत ख़बर

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बैंकॉक में मंगलवार को फ़ेसबुक यूज़र्स को फ़ेसबुक सेफ़्टी चेक फीचर की ओर से एक 'विस्फोट' को लेकर ग़लत अलर्ट मिले.

फ़ेसबुक ने ख़तरे के हालात में यूज़र्स को ख़ुद को सुरक्षित बताने के फीचर की शुरुआत की है.

हालांकि फ़ेसबुक का इस बारे में ये कहना है कि 'घटना की पुष्टि के लिए उसने थर्ड पार्टी पर भरोसा किया था.'

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इससे कई लोगों को ऑनलाइन विस्फोट की ग़लत ख़बर मिली और उन्होंने इसे इंटरनेट पर शेयर भी किया.

हाल ही में फ़ेक न्यूज फैलाने के लिए फ़ेसबुक की खासी आलोचना हो चुकी है.

क्या हुआ था बैंकॉक में?

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दरअसल मंगलवार को बैंकॉक में एक प्रदर्शनकारी ने एक सरकारी इमारत पर पटाखे फेंके थे.

फ़ेसबुक के मुताबिक़ इसके बाद सेफ्टी चेक फीचर ने स्थानीय समयानुसार करीब नौ बजे रात में 'द एक्सपलोज़न इन बैंकॉक' नाम से एक पेज बनाया और लोगों ने उसमें ख़ुद को सुरक्षित होने के बारे में सूचना देनी शुरू कर दी. और इस तरह से यह ख़बर फैल गई.

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इस पेज पर एक वेबसाइट बैंकॉक इनफ़ॉर्मर डॉटकॉम का भी लिंक था जो बैंकॉक में 2015 में हुए एक धमाके का पुराना बीबीसी वीडियो था.

कैसे काम करता है फेसबुक सेफ़्टी चेक?

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यह फीचर जब पहले पहल शुरू हुआ था तब इसे मैनुअली अलर्ट किया जाता था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया.

अब कोई घटना होने पर लोग ख़ुद फेसबुक को घटना के बारे में अलर्ट करते हैं.

तब फ़ेसबुक इस बात की पड़ताल करता है कि लोग इस घटना के बारे में उस इलाके में बात कर रहे हैं या नहीं.

अगर उस इलाके में कई लोग इसके बारे में बात कर रहे होते हैं, तो ख़ुद को सुरक्षित बताने को लेकर फेसबुक पर एक फीचर अपने आप एक्टिव हो जाता है.

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