क्या आपका ब्लड ग्रुप भी 'बॉम्बे' है?

  • 12 जनवरी 2017
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Image caption अमिताभ कुमार (चेक शर्ट में) का ब्लड ग्रुप बॉम्बे है.

"आखिर ना कैसे बोलूं. तीन ज़िंदगियों का सवाल था. हम खून देने के लिए आगे नहीं आते तो कौन उनकी मदद करेगा. हम दूरियों और वक्त की पाबंदी की परवाह नहीं करते."

लौहनगरी जमशेदपुर में रहने वाले अमिताभ कुमार एक सांस में बोलकर पल भर के लिए खामोश हो जाते हैं. हमनें इतना पूछा था, "आप, बेहद मुश्किलों में पड़े जरूरतमंदों को खून देने के लिए देश के कई हिस्सों में कैसे चले जाते हैं?

अमिताभ कुमार का ब्लड ग्रुप 'बॉम्बे' है. और यह ग्रुप अति दुलर्भ है. हाल ही में अमिताभ और रांची के एक युवा व्यवसायी विनय टोप्पो ने झारखंड से कोलकाता पहुंचकर एक-एक यूनिट रक्त दान किया था. विनय टोप्पो का खून भी 'बॉम्बे' ग्रुप का है.

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Image caption विनय टोप्पो (हाथ में मोबाइल लिए हुए) बिजनेस करते हैं.

कोलकाता में इन दोनों से खून लिए जाने के बाद उसे तुरंत हवाई जहाज से शिलॉन्ग ले जाया गया, जहां प्रसव के दौरान एक महिला अंजना तिर्की और उनकी दो जुड़वा बेटियों की जान सुरक्षित हो सकी.

राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान रांची में पैथोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर आरके श्रीवास्तव बताते हैं, "साल 1952 में बंबई ( अब मुंबई) में डॉक्टर एमआर भेंडे ने इसका पता लगाया था. दूसरी रक्त समूहों में ऐंटिजन-एच होते हैं, जबकि 'बॉम्बे' में ये ऐंटिजन नहीं पाए जाते. इसे एचएच ग्रुप भी कहा जाता है."

उनके मुताबिक, दुनिया की आबादी के मानकों पर दस लाख में से चार लोगों में यह मौजूद है. भारत के कुछ हिस्सों में ये अनुपात ज्यादा हो सकता है.

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'बॉम्बे' ग्रुप के किसी व्यक्ति में इसी ग्रुप का खून चढ़ाया जा सकता है. हालांकि 'बॉम्बे' ग्रुप वाले ए, बी, ओ, ग्रुप के लोगों के लिए भी रक्त दान कर सकते हैं, लेकिन सामान्य प्रैक्टिस में यह होता नहीं है.

शिलॉन्ग से अंजना के पति जस्टिन पॉल ने बीबीसी से फोन पर बातचीत में वे बताया, "जांच के दौरान पता चला था कि अंजना के गर्भ में दो बेबी हैं तब उनके स्वागत को हम-दोनों आतुर थे. प्रसव को लेकर बड़ा ऑपरेशन (सिजेरियन) तय हुआ और अनिता को ख़ून की कमी की वजह से डॉक्टरों ने एहतियातन खून का इंतजाम करने को कहा था. तब वो वक्त तनाव और उलझन वाला था."

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Image caption अंजना और उनके पति जस्टिन पॉल नवजात बच्चों के साथ.

मेघालय में 'बॉम्बे' ग्रुप का कोई रक्तदाता नहीं मिलने पर वे हताश थे. लेकिन अमिताभ कुमार और विनय टोप्पो झारखंड से उन्हें ख़ून देने आए. रांची के विनय टोप्पो कहते हैं दिसंबर महीने की वजह से हाथ में कई काम थे, लेकिन उन्होंने कोलकाता पहुंचना जरूरी समझा.

फेडरेशन ऑफ इंडियन ब्लड डोनर्स ऑर्गेनाइजेशन (फिबडो) के महासचिव विश्वस्वरूप का कहना है कि देश भर में 'बॉम्बे' ग्रुप से लगभग डेढ़ सौ डोनर की सूची है.

विनय शेट्टी का कहना है अध्ययन में ये तथ्य सामने आते रहे हैं, "विश्व में दस लाख की आबादी में चार लोग 'बॉम्बे' ग्रुप वाले हैं. भारत में तो कई लोगों को लंबे समय तक पता भी नहीं रहता कि उनका ब्लड ग्रुप क्या है, लिहाजा संख्या को लेकर ठोस नतीजे बताना मुश्किल हो सकता है, लेकिन भारत में ये संख्या ज्यादा है."

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Image caption राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान रांची में पैथोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर आरके श्रीवास्तव.

वे और उनके सहयोगी मिलकर 2020 तक भारत को रक्त उपलब्धता के मामलों में दुनिया के उन 59 देशों की सूची में शामिल कराना चाहते हैं जहां खून के बिना किसी की जानें नहीं जाती.

इस बीच शिलांग में जस्टिन की पत्नी और नवजात बेटियां अब बेहतर हैं. जस्टिन कहते हैं कि अपनी पत्नी और बेटियों की मुस्कान देखकर अमिताभ और विनय टोप्पो का आभार जताने के लिए उनके पास शब्द कम हैं.

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