ट्रंप के आदेश के ख़िलाफ़ ट्विटर ने दिया लाखों का दान

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सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर के कर्मचारियों ने अमरीकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) को 10 लाख डॉलर यानी 6 करोड़ 70 लाख रुपए का दान दिया है.

इससे पहले एसीएलयू ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक्ज़ीक्यूटिव आदेश के ख़िलाफ़ कोर्ट में याचिका दायर की थी.

इस आदेश के अनुसार सीरियाई प्रवासियों के अमरीका आने और ईरान, इराक़, यमन और लीबिया समेत सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को वीज़ा जारी करने पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी.

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एसीएलयू का कहना है कि बीते कुछ दिनों में उन्होंने ऑनलाइन 2.4 करोड़ डॉलर का दान मिला है. इससे पहले टैक्सी चलाने वाली कंपनी लिफ्ट ने कहा था कि वो चार सालों में एसीएलयू को 10 लाख डॉलर देगी.

तकनीकी ख़बरों की वेबसाइट टेकक्रंच के अनुसार ट्विटर के एक हज़ार कर्मचारियों ने दान करने के लिए 5 लाख डॉलर की धनराशि इकट्ठा की. इसमें कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डॉरसी और कार्यकारी अध्यक्ष ओमिद कोर्देस्तानी ने इसके बराबर धनराशि दान में दी.

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'हमारा काम अभी खत्म नहीं'

वेबसाइट के पास ट्विटर के कर्मचारियों को भेजा गया एक ईमेल है जिसके बारे में वकील विजया गादे कहती हैं, "हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ है."

उनका कहना है, "आने वाले महीनों में हम कई क़ानूनी लड़ाइयां, झटके और घोषणाएं देखेंगे. लेकिन जब भी इंसान की आज़ादी छीनी जाएगी, मुझे ये कहते हुए गर्व है कि हम अपनी आज़ादी के लिए उठ खड़े होंगे और लोगों का साथ देंगे."

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ब्लूमबर्ग में छपी एक ख़बर के अनुसार अमरीका की कई टेक कंपनियां राष्ट्रपति ट्रंप को एक ख़ुला ख़त लिखने की तैयारी कर रही हैं जिसमें वो उनके आदेश के संबंधित चिंताओं के बारे में लिखेंगे और इसे ठीक करने में मदद की पेशकश करेंगे.

इस बीच मैसेजिंग ऐप वेबर ने ट्रंप के आदेश के प्रभावित देशों- इराक़, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के लिए मुफ़्त अंतरराष्ट्रीय फ़ोन कॉल की सुविधा की घोषणा की थी.

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