चंगेज़ ख़ान की कब्र खोज पाएगी सैटेलाइट?

  • 26 फरवरी 2017
चंगेज़ ख़ान के रोल में एक कलाकार.

मंगोलियन शासक चंगेज़ ख़ान की क़ब्र खोजना शे हर नॉय के लिए 800 साल पुरानी पहेली को सुलझाने जैसा था.

वो उस जगह की तलाश में थे, जहां मंगोल शासन के संस्थापक को दफ़नाया गया था. इस दौरान सैटेलाइट फ़ोटो देने वाली एजेंसी डिजिटल ग्लोब ने उन्हें संभावित जगहों की कुछ तस्वीरें उपलब्ध कराईं.

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ये सैटेलाइट से ली गई बहुत बड़ी तस्वीरें थीं. किसी को यह नहीं पता था कि चंगेज़ ख़ान का मकबरा आखिर दिखता कैसा है. उनके दिमाग़ में ऐसी कोई जगह भी नहीं थी, जहां से खोज अभियान शुरू किया जा सके.

इसलिए नॉय ने लोगों से जानकारी जुटाने का फ़ैसला किया. वो तीन बार मंगोलिया गए और उन तस्वीरों की असंगतियों की पड़ताल की. उन्होंने जानना चाहा कि क्या इनमें से कोई चंगेज ख़ान की क़ब्र हो सकती है.

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उनकी खोजबीन जारी है. उन्होंने कहा, '' हमने कुछ पुरातत्विक महत्व की जगहों का पता लगाया जिनकी जांच की अभी भी ज़रूरत है.''

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इस अभियान ने उन्हें लोगों से जानकारी जुटाने का प्लेटफ़ार्म टॉमनाड बनाने के लिए प्रेरित किया, यह इस तरह के काम में लगे लोगों को डिजिटल ग्लोबल की तस्वीरें उपलब्ध कराता है. डिजिटल ग्लोबल ने अंत में इसका अधिग्रहण कर लिया.

यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि आज किस तरह बड़ी और हाई रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरें शौकीनों, वैज्ञानिकों, व्यापारिक घरानों और सरकारों को इस प्लेटफ़ार्म से उपलब्ध कराई जा रही हैं.

गुमशुदा मक़बरों और पुरानी सभ्यताओं की तलाश में लगी टीमें एक साथ आती हैं और भूंकप से हुए नुक़सान का आकलन करती हैं या अवैध कब्जों और वर्षावनों को हुए नुक़सान की निगरानी करती हैं.

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बहुत से स्वयंसेवकों ने मलेशिया एयरलाइंस की लापता फ़्लाइट संख्या एमएच370 की तलाश में हिस्सा लिया और मैथ्यू नामक चक्रवात से हैती में आई बाढ़ से हुए नुक़सान पर नज़र रखी.

तकनीकी का व्यापार

इस काम में व्यापार की भी बहुत अधिक संभावनाएं हैं. इसे आप ऐसे देख सकते हैं कि डिजिटल ग्लोब की तस्वीरें, ऐप आधारित टैक्सी सेवा उबर के ड्राइवरों अपने ग्राहक के पिकअप और ड्राप लोकेशन का पता लगाने में मदद कर रही हैं. टेलीकॉम कंपनियां अपना तारविहीन एंटीना इसके ज़रिया अच्छी जगह लगा पा रही हैं. वहीं नाइजीरिया जैसे देशों को अपना नक्शा बनाने में भी इससे मदद मिली.

डोजिटल ग्लोब के उपाध्यक्ष नॉय बताते हैं, '' हम एक दिन में साढ़े तीन लाख वर्ग किमी इलाक़े की हाई रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें जमा करते हैं.''

वो बताते हैं कि हर सड़क, इमारत, अहाते, जानवर, धाराओं और झीलों की तस्वीरें जुटाई जाती हैं.

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इस तरह से डिजिटल ग्लोब हर दिन क़रीब 70 टेराबाइट (टीबी) डिजिटल तस्वीरें जमा करते हैं. यानी कि इन तस्वीरों से 500 जीबी वाले 140 लैपटाप की मेमोरी फुल हो जाएगी.

इन तस्वीरों के लिए डिजिटल ग्लोब पिछले 17 सालों से उपग्रहों का संचालन भी कर रहा है.

उनकी तस्वीरों का यह भंडार, एक हाई रिजोल्यूशन वाले विशालकाय टाइम मशीन जैसा है, क्योंकि यह इस बात की विस्तृत जानकारी दे रहा है कि हमारी दुनिया कितना बदली है या बदल रही है.

क्लाउड फ्लेटफॉर्म

इतने डाटा को रखने के लिए डिजिटल ग्लोब अमेज़न वेब सर्विस के क्लाउड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती है.

ऐसे ग्राहक जिनके पास जो इतनी बड़ी फ़ाइलों को डाउनलोड नहीं कर सकते, वो अमेज़न वेब सर्विस की कंप्यूटर सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं.

यूरोपियन स्पेश एजेंसी (ईएसए), पृथ्वी पर नज़र रखने वाले कॉपरनिकस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा है. ईएसए भी अपनी तस्वीरों को दुनियाभर के वैज्ञानिकों और प्रतिष्ठानों को क्लाउड के जरिए दे रहा है.

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वहीं एक प्राइवेट क्लाउड नेटवर्क इंटरूट की तस्वीरों के भंडार को भी सरकार से लेकर व्यापारी तक साझा कर रहे हैं. इस तरह के डेटा को व्यापारिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है.

ईएसए के निगरानी वाले उपग्रहों पर कई तरह के सेंसर और हाई रिजोल्यूशन वाले कैमरे लगे हुए हैं. ये उपकरण समुद्र के स्तर और ज़मीन की गुणवत्ता में आने वाले परिवर्तनों का भी पता लगा सकते हैं.

ये यह भी पता लगा सकते हैं कि जल प्रदूषण कितना फैला है या जिवाश्म ईंधन जलाने का क्या प्रभाव पड़ रहा है. और ओज़ोन परत में क्या बदलाव आया है.

ईएसए के डेटा वैज्ञानिक पियरे फ़िलिप मैथ्यू कहते हैं, '' इस तरह के डाटा का बहुत अधिक वैज्ञानिक महत्व है. पर्यवेक्षण ही विज्ञान का आधार है. डाटा के विश्लेषण के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकते हैं.''

कुल व्यावसयियों ने किसानों, मौसम के आंकड़ों के विश्लेषण, ज़मीन और पौधों के विश्लेषण और स्थानीय ख़बरों के लिए ऐप विकसित किए हैं, जो कि उनका व्यापार बढ़ाने में मदद कर रहे हैं.

इसी तरह का एक और ऐप प्रदूषण से जुड़े आंकड़े जुटाता है, जिससे दौड़ने वालों को साफ़ हवा वाले रास्ते चुनने में मदद मिलती है.

मैथ्यू कहती हैं, ''हम सूचनाओं का हाइवे बना रहे हैं. क्लाउड इस हाइवे की रीढ़ है. डेटा पैसे की तरह है, अगर यह आगे नहीं बढ़ता है तो इसका कोई मूल्य नहीं है.''

शे हर नॉय कहते हैं, '' पिछले तीन सालों में इस तकनीक की प्रासंगिकता में भारी उछाल आया है. और हम सब इसका फ़ायदा उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.''

लेकिन क्या वह चंगेज़ ख़ान का मक़बरा खोजने से बेहतर होगा?

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