जलवायु परिवर्तन से बिगड़ रहा है बच्चों का स्वास्थ्य

  • 30 मार्च 2017
वायु प्रदूषण इमेज कॉपीरइट Getty Images

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ धरती का तापमान बढ़ने और कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पराग कणों की मात्रा में इज़ाफा हो रहा है. इस वजह से बच्चों में अस्थमा यानी सांस की बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहनों, उद्योग धंधों और निर्माण के काम के कारण उड़ने वाले धूल की वजह से पैदा होने वाले वायु प्रदूषण से बच्चों में पहले से ही अस्थमा की शिकायत आ रही हैं.

चूल्हे ने बदल दी है इनकी ज़िंदगी

हवा में प्रदूषण को नापते कबूतर

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट 'इनहेरिटिंग ए सस्टेनेबल वर्ल्ड: एटलस ऑन चिल्ड्रेन्स हेल्थ एंड इंवायरमेंट' में भी यह दावा किया गया है कि पांच साल से कम उम्र के सत्रह लाख बच्चे हर सल पर्यावरण संबंधी समस्याओं के कारण मौत का शिकार हो रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, "जलवायु परिवर्तन, हवा की गुणवत्ता को कई तरह से प्रभावित कर सकता है. ग्रह का तापमान और कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के साथ ही ओज़ोन और पराग कण की मात्रा में बढ़ जाती है."

वायु प्रदूषण से दिमाग़ को भी नुक़सान?

डब्लूएचओ की वैज्ञानिक डॉक्टर एनीट प्रुस उस्टुन का कहना है कि कार्बन डाइ ऑक्साइड और पराग कणों की मात्रा बढ़ने के बीच रिश्ता बिल्कुल साफ है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "कार्बन डाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि के साथ ही पौधों की कई प्रजातियों से पराग समय से पहले और अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं."

इमेज कॉपीरइट Reuters

"जलवायु परिवर्तन के साथ ही पौधों की कई प्रजातियों के नए भौगोलिक क्षेत्र में जाने की वजह से इन नए क्षेत्रों की हवा में पराग पाए जा रहे हैं."

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु में होने वाले परिवर्तन की वजह से पौधों की कई प्रजातियों के व्यवहार में भी तब्दीली आ रही है.

वैज्ञानिकों का कहना है, "इसे सीधे बच्चों में अस्थमा के बढ़ते मामलों के साथ जोड़कर भी देखा जा रहा है. पिछले दो दशकों में बच्चों में अस्थमा के पचास फ़ीसदी अधिक मामले पाए गए हैं."

कोहरे-वायु प्रदूषण से कैसे बचें?

खांसते हैं तो थूक भी कालिख सी निकलती है

डब्लूएचओ का कहना है कि पांच साल और उससे अधिक उम्र के 11 से 14 फ़ीसदी बच्चों में अस्थमा के लक्षण पाए गए हैं. डब्लूएचओ के अनुसार, "इनमें से 44 फ़ीसदी मामले पर्यावरण से जुड़े हुए हैं. अस्थमा की सबसे बड़ी वजह वायु प्रदूषण है."

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन भौगोलिक क्षेत्रों में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा तेज़ी से बढ़ रही है वहां के लिए इस रिपोर्ट के नतीजे चिंताजनक हैं.

प्रदूषण पर प्रदर्शन लेकिन किसके ख़िलाफ़?

काले कोहरे में किसानों को राह दिखाती एक लड़की

विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्र शामिल हैं. इन क्षेत्रों में बिजली के उत्पादन के लिए कोयले के इस्तेमाल की वजह से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर होता है.

इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन की 2016 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण पूर्व एशिया में अगले दो दशकों में तीन गुणा अधिक कोयले की खपत होगी.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ इस क्षेत्र में 2014 में 142 मैट्रिक टन कार्बन की मांग थी और 2040 तक यह मांग बढ़कर 240 मैट्रिक टन तक हो जाएगी.

अब विटामिन बी की खुराक बचाएगी वायु प्रदूषण से

चीन: इस शहर का वायु प्रदूषण आधा हो गया

दक्षिण पूर्व एशिया में पैदा होने वाली बिजली का चालीस फ़ीसदी हिस्सा कोयले से पैदा किया जाता है.

इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन के मुताबिक़ यह क्षेत्र अगले दो दशकों में भारत के बाद दूसरा सबसे बड़ा कोयले का आयातक देश होगा.

भारत सरकार ने 2020 तक कोयले की अपनी खपत को दोगुनी कर के डेढ़ खरब टन करने का एलान किया है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन की नई रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन अपने कोयले की खपत को 2040 तक कम कर के 2521 मैट्रिक टन करना चाहता है. 2014 में चीन में कोयले की मांग 2896 मैट्रिक टन की थी.

दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के कई शहरों में पहले से वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है.

पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन से चिंतित: मोदी

'जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ जंग में भारत अहम'

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक़, "कम आय वाले देशों के 98 फ़ीसदी शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर डब्लूएचओ के मानकों से ऊपर है."

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 2014 में प्रदूषण का सलाना औसत स्तर 73.63 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे