ऑस्ट्रेलिया- 'मांस खाने वाले बैक्टीरिया के कारण खोने पड़े पैर'

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ऑस्ट्रलिया में एक व्यक्ति के परिवार ने बताया है कि उसे एक मांस खाने वाले बैक्टीरिया की इन्फ़ेक्शन के कारण दोनों पैर खोने पड़े हैं.

फिलिपींस के टेरी परेजा अपने रिश्तेदारों से मिलने ऑस्ट्रेलिया गए थे लेकिन एक महीना पहले वो बीमार पड़ गए.

उनकी बेटी जेफ़मेरी परेजा ने बताया कि उनके परिवार को लगा कि किसी मकड़ी ने उन्हें काटा है लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि इसके कोई सबूत नहीं हैं.

जेफ़मेरी ने बीबीसी को बताया, ''वो (बैक्टीरिया) उन्हें जिंदा खा रहा था. उन्हें 12 से 18 महीन तक अस्पताल में रहना पड़ेगा."

उन्होने बताया कि 65 वर्षीय टेरी परेजा को नेक्रोटाइज़िंग फेसिसटीज़ हुआ है.

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क्या होता है नेक्रोटाइज़िंग फेसिसटीज़?

नेक्रोटाइज़िंग फेसिसटीज़ एक बैक्टीरिया की वजह से होता है जिसे ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकॉक्सास (स्ट्रेप ए) कहते हैं. ये नाक और गले में रहता है या कई लोगों की त्वचा पर होता है जो किसी तरह का नुकसान नहीं करता.

अगर ये कटी फटी त्वचा या क्षतिग्रस्त ऊतकों के ज़रिए दिल , फेफड़ों या मांसपेशियों में पहुंच जाए है तो घातक हो सकता है.

फिर ये मांस पर हमला करता है, जिससे शरीर की पूरी प्रणाली पर असर होता है और अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे मौत तक हो जाती है.

जेफ़मेरी ने मेडिकल बिलों की भरपाई के लिए 10 हज़ार डॉलर से ज़्यादा राशि फंडरेज़िंग के ज़रिए इकट्ठा की.

वो कहती हैं, '' वो यहां छुट्टियां बिताने आए थे लेकिन ये एक हादसा बन गया. ''

ऑस्ट्रेलियन इंफेक्शियस डिसीज़ रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रोफेसर मार्क वॉकर वे बताया कि ये एक दुर्लभ बीमारी है.

उन्होने कहा '' नेक्रोटाइज़िंग फेसिसटीज़ बीमारी जब हो जाती है तो फिर ये तेज़ी से फैलती है. जिन लोगों को ये बीमारी होती है उनका इलाज एंटीबायोटिक से किया जाता है. लेकिन यहां नुकसान पहले ही हो चुका होता है.''

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बीमारी की वजह मकड़ी का काटना?

क्लीनिकल टॉक्सिकोलोजिस्ट डॉक्टर जेफ़ इसबिस्टर जिन्होंने इस विषय पर साल 2004 में एक अध्य्यन प्रकाशित किया था, उनका मानना है कि ऐसा नहीं है.

डॉक्टर इसबिस्टर ने बताया कि मकड़ी के काटने से इस बीमारी को जोड़ना महज़ एक भ्रम है. ये अमूमन स्ट्रेप्टोकॉकल संक्रमण की वजह से होता है.

वो कहते हैं, ''अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें किसी को मकड़ी ने काटा हो और फिर उसे पकड़कर ये जांच की गई हो कि इसकी वजह से नेक्रोटाइज़िंग फेसिसटीज़ हुआ हो.''

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