मर्द क्यों नहीं लेते गर्भनिरोधक गोलियां?

  • 14 मई 2017
पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक इमेज कॉपीरइट Getty Images

इसके बारे में लंबे समय से बात की जाती रही है और अब ये लग रहा है कि गर्भ निरोधक गोलियों का पुरुष संस्करण जल्द ही हक़ीक़त की दुनिया में आ सकता है.

ये गोली दरअसल एक इंजेक्शन की शक्ल में होगी और एक रिपोर्ट के अनुसार 'रिसग' नाम का ये गर्भनिरोधक कॉन्डम की तरह ही असरदार होगा.

ये मौजूदा उपलब्ध विकल्पों से सस्ता हो सकता है. हालांकि ये गर्भ निरोध का कोई स्थाई समाधान भी नहीं है. सरकारी एजेंसियों से इस नई दवा को फ़िलहाल मंजूरी मिलना बाकी है.

इमेज कॉपीरइट PA

लेकिन अभी जश्न मनाने का समय नहीं आया है क्योंकि गर्भनिरोधक बनाने वाली बड़ी दवा कंपनियों का ध्यान अपनी ओर खींचने में 'रिगस' फ़िलहाल संघर्ष ही कर रहा है.

पुरुष गर्भनिरोधक दवाओं का इतिहास लंबा और थकाऊ भी है. एक जानकार का कहना है कि दवा कंपनियों के आला अधिकारी इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं.

औलाद नहीं चाहिए तो ये लेप लगाइए

पुरुषों के लिए गर्भ निरोधक इंजेक्शन!

पुरुष गर्भनिरोधक गोली बनने की उम्मीद बढ़ी

इमेज कॉपीरइट Getty Images

पैसा बड़ा मुद्दा?

हर्जन कोएलिंग बेनिंक पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं.

उनका कहना है, "हक़ीक़त ये है कि बड़ी कंपनियां अधेड़ उम्र के गोरे मर्द चलाते हैं और उन्हें लगता है कि वे इसका इस्तेमाल कभी नहीं करेंगे, यही समस्या की जड़ है."

आम धारणा ये है कि बच्चा न पैदा करने की ज़िम्मेदारी पुरुष नहीं लेना चाहते, लेकिन अब इस विचार को चुनौती दी जा रही है.

इमेज कॉपीरइट Science Photo Library

क्या पैसा बड़ा मुद्दा है? ये कहा जा रहा है कि 'रिसग' गर्भनिरोधक गोलियों से दवा कंपनियों को होने वाले मौजूदा मुनाफ़े को आधा कर सकता है और कॉन्डम के बाज़ार को भी इससे ख़तरा है.

इसमें कोई शक नहीं है कि सस्ते, सुविधाजनक और अस्थाई गर्भनिरोधकों के लिए बड़ा बाज़ार मौजूद है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक विकासशील देशों में साढ़े 22 करोड़ महिलाएं बच्चा पैदा करने में देरी करना या इसे रोकना चाहती हैं, लेकिन गर्भनिरोध के अन्य विकल्पों की उनकी ज़रूरत पूरी नहीं हो पा रही है.

प्रेंगनेंसी रोकने के चार नए तरीके

गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए

ये इंजेक्शन बाप बनने से रोकेगा

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे